नरबलि के सात आरोपियों को मृत्युदंड

Thursday, March 27, 2014

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फांसी

दुर्ग | संवाददाता: दुर्ग के रूआबांधा में डेढ़ वर्षीय बच्चे की मानवबलि के मामले में सात लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई है. घटना 23 नवम्बर 2010 की है. मामले में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिसमें 4 नाबालिग बच्चे भी शामिल थे.

भिलाई नगर थाना अंतर्गत रूआबांधा बस्ती में ईश्वरी शक्ति प्राप्त करने के लिए ईश्वर यादव एवं उनकी पत्नी किरण यादव ने अपने 5 साथियों महानंद यादव, राजेन्द्र महार, सुखदेव यादव, हेमंत साहू, अजय यादव के साथ मिलकर अपने पड़ोस में रहने वाले पोषण सिंह राजपूत के दो वर्षिय बालक चिराग का घटना दिवस अपहरण कर अपने घर लेकर व अपनी तांत्रिक शक्ति बढ़ाने के लिए अपने साथियों के साथ मिलकर उसकी बलि देकर बच्चे को जमीन में गड़ा दिया.

इस कार्य में उनके दो और साथी कृष्णा एवं तम्बी भी शामिल थे. जो अब तक पुलिस पकड़ से बाहर है. मामले में आज जिला एवं सत्र न्यायाधीश गौतम चौड़रिया के बच्चे का अपहरण कर हत्या करना एवं साक्ष छुपाने के मामले में 7 को फांसी की सजा सनाई.

शासकीय अभिभाषक एवं लोक अभियोजक सुदर्शन महलवार ने बताया कि घटना के मुख्य आरोपी ईश्वर यादव तांत्रिक शक्ति पढ़ाने के लिए घटना को अंजाम दिया था. उसके साथ उनके शिष्य भी इस घटना में जुड़े रहे ताकि वे भी अपने तांत्रिक क्रियाकलाप को अंजाम दे सके. ईश्वर और किरण यादव ने अपने बच्चे प्रिंस, प्रिया व प्रीति को भी तांत्रिक शक्ति का उतराधिकारी बनाने के लिए इस दौरान अपने साथ रखना चाहते थे. जो उक्त दिवस राजनांदगांव किरण यादव के मैयके में थे. जिन्हें लाने के लिए किरण ने अपने शिष्य अजय यादव को राजनांदगांव भेजा.

बताया गया कि अजय यादव व हेमंत साहू ने ही चिराग का अपहरण किया. उसके बाद ईश्वर यादव के बच्चे को लाने के लिए राजनांदगांव चले गए. तीनों बच्चों को लाकर सभी लोग एक साथ मिल शाम करीब 6 से 7 बजे की मध्य बच्चे की बलि की घटना को अंजाम दिया.

बजरंग चौक रूआंबांधा निवासी पोषण राजपूत और उसकी पत्नी दुर्गा राजपूत मजदूरी करते थे. दोनों रोज की तरह घटना दिवस को अपने डेढ़ साल के बेटे चिराग राजपूत को उसके मौसी वंदना राजपूत के पास छोड़कर काम पर चले गए थे. दोपहर में अचानक चिराग घर से गायब हो गया. वंदना ने आसपास काफी खोजबीन की थी लेकिन चिराग का पता नहीं चला था. वंदना ने फोन कर अपने जीजा और दीदी को घटना की जानकारी दी थी.

शाम तक चिराग के गायब होने की खबर मोहल्ले में फैल गई थी. काफी संख्या में लोग पोषण के घर के पास जमा हो गए थे. इसी बीच मोहल्ले के ही ईश्वरी यादव के घर काफी तेज आवाज में गाना बज रहा था. लोगों को शक हुआ तो ईश्वरी के घर घूस गए. जहां पूजा स्थल पर तांबे के लोटे में खून था. लोगों ने दबाव बनाते हुए ईश्वरी से पूछताछ की तो वह चिराग का बलि देना कबूल कर लिया. ईश्वरी ने कहा कि वह चिराग का जीभ और गला काटकर जमीन में गड़ा दिया है. लोगों ने तत्काल जमीन की खुदाई की तो धड़ और सिर अलग-अलग मिले थे.
कोतवाली पुलिस ने तांत्रिक ईश्वरी लाल यादव और उसकी पत्नी के खिलाफ जुर्म दर्ज कर गिरफ्तार किया था. पूछताछ में ईश्वरी ने घटना को अंजाम देने में सहयोग करने वालों बजरंग पारा रुआंबांधा निवासी हेमंत साहू, आजाद चौक रुआंबांधा निवासी सुखदेव यादव, खानबाबा ऊर्फ निहाल्लूदिन ऊर्फ कल्लू, राजेन्द्र महार, हनौद उतई निवासी महानंद ठेठवार का भी नाम बताया था.

मामले में पुलिस ने 11 लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया था. जिसमें 4 नाबालिग बच्चे थे. 3 बच्चे तांत्रिक के ही थे. बताया गया कि ईश्वरी लाल ने इससे पहले दुर्ग के एक देवार बच्ची की भी बलि दी थी.

बताया कि इसके पूर्व जिला न्यायालय दुर्ग में दो और प्रकरण में फांसी की सजा सुनाई गई है. जिसमें गतवर्ष 23 अप्रैल 2013 को ढालसिंग मोहदीपाट को फांसी की सजा सुनाई गई. जिन्होंने अपने परिवार के लोगों को मौत के घाट उतार दिया था तथा 25 जून 2013 को छन्नूलाल को फांसी की सजा सुनाई गई. जिन्होंने गवाहों की हत्या कर दी थी.

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