दिल्ली गैंगरेप के आरोपियों का मृत्युदंड बरकरार

Thursday, March 13, 2014

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रेप

नई दिल्ली | एजेंसी: दिल्ली हाइकोर्ट ने निर्भया कांड के चारों दोषियों को निचली अदालत से मिली मृत्युदंड की सजा बरकरार रखी है. इस मामले में चार आरोपियों मुकेश (26), अक्षय ठाकुर (28), पवन गुप्ता (19) और विनय शर्मा (20) को दिल्ली के साकेत कोर्ट ने सितंबर 2013 को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी.

16 दिसंबर, 2012 को दक्षिणी दिल्ली में चलती बस में एक प्रशिक्षु फीजियोथेरेपिस्ट ज्योति सिंह पांडे के साथ छह लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया और पीड़िता को अमानवीय यातनाएं दीं जिससे बाद में उसकी मौत हो गई. मामले में त्वरित अदालत ने चार दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी जिस पर उच्च न्यायालय से पुष्टि होनी थी.

गुरुवार को सुनवाई में दिल्ली हाइकोर्ट की न्यायपूर्ति रेवा खेत्रपाल और न्यायपूर्ति प्रतिभा रानी की खंडपीठ ने चार दोषियों की वह अपील भी खारिज कर दी जिसमें उन्होंने निचली अदालत द्वारा उन्हें सुनाई गई सजा-ए-मौत को चुनौती दी थी.

पीड़िता के साथ दुष्कर्म करने वाले छह लोगों में एक किशोर भी शामिल था. आरोपियों ने पीड़िता और उसके पुरुष साथी को सर्दियों की रात में वस्त्रहीन हालत में सड़क पर फेंक दिया और भाग निकले. बाद में पीड़िता को इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया जहां माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में 29 दिसंबर 2012 को उसकी मौत हो गई.

आरोपियों में से एक दिल्ली के तिहाड़ जेल में मृत पाया गया. अपराध में शामिल किशोर को 31 अगस्त 2013 को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने तीन वर्षो के लिए सुधार गृह भेज दिया. जुवेनाइल कानून के तहत यह अधिकतम सजा है.

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