तमिलनाडु में बंधक छत्तीसगढ़ के 6 लाल

Monday, September 5, 2016

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बंधुवा मजदूर

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के 6 लाल अभी भी तमिलनाडु में बंधक हैं. जिनमें से 3 नाबालिक हैं. इसकी जानकारी वहां से भागकर छत्तीसगढ़ पहुंचे 4 युवकों ने दी जो वहां पर बंधक बनाकर रखे गये थे. सभी युवक पिथौरा के हैं. इन्हें तमिलनाडु के अरंडा स्थित बोरवेल कंपनी के मालिक ने बंधक बनाकर रखा था. उनसे खेतों में काम कराया जा रहा था.

तमिलनाडु से भागकर छत्तीसगढ़ पहुंचे इन चारों मजदूरों का नाम है पवन प्रजापति, डिगेराम प्रजापति, लक्ष्मी प्रसाद प्रजापति तथा सुखरी निवासी चमरू गोंड. इन्हें अप्रैल माह में सुखरी के दलाल विजय यादव तथा चंद्रध्वज ने तमिलनाडु के एक बोरवेल कंपनी में साढ़े सात हजार रुपये मासिक वेतन मिलने की बात कहकर ले गया था.

तमिलनाडु से भागकर आये बंधक मजदूरों ने कहा कि उन्हें छोड़ने के लिये बोरवेल मालिक प्रति मजदूर 10 हजार रुपये याने कुल 60 रुपये मांग रहा है. बोरवेल मालिक 60 हजार रुपये उसके बैंक अकाउंट में जमा कराने की बात कह रहा है.

पिछले माह इन चारों को महाराष्ट्र के जमखेड में बोरवेल के काम के लिये भेज दिया गया था जहां पर उन्हें दिनभर काम कराने के बाद इमली पानी वाला चावल खाने के लिये दिया जाता था. बंधक बनाने वाले बोरवेल कंपनी के मालिक को सैंडिल सेठ कहा जाता था.

इन चारों ने बताया कि वहां से रात के समय भागकर, चार दिनों तक पैदल चलते हुये वे अहमदनगर पहुंचे. जहां से इन लोगों ने अपने एक मित्र के मौबाइल पर फोन करके वस्तुस्थिति की जानकारी दी. जिसके बाद जन जागृति नाम के एक गैर-सरकारी संगठन ने उन्हें यहां पहुंचाया.

पिथौरा पुलिस अभी भी तमिलनाडु में बंधक 6 मजदूरों को जिनमें से 3 नाबालिक हैं जल्द जाने वाली है. इसके लिये एक दल का गठन किया गया है.

गौरतलब है कि इसी साल फरवरी माह के पहले पखवाड़े में खबर मिली थी कि तमिलनाडु के चेन्नई तथा तिरुपति सी सीमा में स्थित पुनगुर में छत्तीसगढ़ के 10 मजदूरों को बंधुवा बना लिया गया था. सभी बंधक मजदूर बीजापुर तथा नारायणपुर के थे. इसकी जानकारी भी उस समय वहां से भागकर आये 4 मजदूरों ने दी थी.

पिछले साल अक्टूबर माह में छत्तीसगढ़ के 28 बंधुवा मजदूरों को तमिलनाडु से मुक्त कराया गया था. इनसे तमिलनाडु के नम्मकल के ईंट भट्टे में काम कराया जा रहा था.

छत्तीसगढ़ से पलायन होता है:
मार्च 2015 में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव के सवाल के जवाब में राजस्व विभाग के मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय ने बताया था, ”वर्ष 2012 से 2015 तक 95924 लोगों ने राज्य से पलायन किया है.” उन्होंने बताया कि वर्ष 2012-13 में 22149 मजदूरों ने, वर्ष 2013-14 में 27830 मजदूरों ने और वर्ष 2014-15 में 45945 मजदूरों ने छत्तीसगढ़ से दूसरे राज्यों में पलायन किया है. मंत्री ने बताया कि वर्ष 2012 से वर्ष 2015 के मध्य राज्य के जांजगीर चांपा जिले से 29190 मजदूरों ने, बलौदाबाजार जिले से 23005 मजदूरों ने, महासमुंद जिले से 16378 मजदूरों ने, बेमेतरा जिले से 10180 मजदूरों ने, राजनांदगांव जिले से 9419 मजदूरों ने, मुंगेली जिले से 6346 मजदूरों ने, रायगढ जिले से 625 मजदूरों ने, बिलासपुर जिले से 456 मजदूरों ने, बालोद जिले से 145 मजदूरों ने, जशपुर जिले से 118 मजदूरों ने तथा कोरबा जिले से 62 मजदूरों ने पलायन किया है.

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