छत्तीसगढ़ में बाघ ब्रीडिंग: सच या झूठ?

Friday, April 12, 2013

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बाघ

रायपुर | विशेष संवाददाता: क्या छत्तीसगढ़ के सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व में बाघों की ब्रीडिंग की कोई योजना है? कम से कम सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व के फिल्ड डायरेक्टर और वन संरक्षक, वन्य जीव राकेश चतुर्वेदी का जवाब तो ‘हां’ में है. राकेश चतुर्वेदी का कहना है कि सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व में देश की पहली टाइगर ब्रीडिंग योजना नक्सलियों के कारण शुरु नहीं हो पा रही है. उनका दावा है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने इसके लिये सैद्धांतिक मंजूरी भी दे दी है.

लेकिन राकेश चतुर्वेदी के दावे के उलट उनके आला अधिकारी सिरे से इस बात से इंकार कर रहे हैं. उनका कहना है कि राकेश चतुर्वेदी झूठी वाहवाही के लिये काल्पनिक योजनायें हवा में बना रहे हैं. कुछ अधिकारियों का आरोप है कि अपने को खबर में बने रखने के लिये चतुर्वेदी ने यह बात फैलाई है और उनकी इस काल्पनिक योजना में कोई सच्चाई नहीं है.

गौरतलब है कि राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिज़र्व में जब बाघ खत्म हो गये तब देश में पहले पहल जून 2008 में सरिस्का टाइगर रिज़र्व में बाघों को फिर से बसाने की योजना के तहत वन विभाग राजस्थान के ही रणथंभौर से चार साल उम्र वाले एक बाघ को हेलिकॉप्टर से ले कर था. बाद में एक बाघिन को भी लाया गया था. ‘टाइगर रिइंट्रोडक्शन’ की यह योजना बाद में मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिज़र्व में भी शुरु की गई, जहां कान्हा और बांधवगढ़ से बाघ-बाघिन लाये गये थे. विभाग ने इस योजना के सहारे बाघों की बढ़ोत्तरी में सफलता भी पाई.

जब ‘टाइगर रिइंट्रोडक्शन’ से आगे बढ़ कर छत्तीसगढ़ के सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व में देश की पहली ‘टाइगर ब्रीडिंग’ योजना का दावा किया गया तो स्वभाविक रुप से मीडिया में इसको लेकर उत्सुकता भी हुई. टाइम्स ऑफ इंडिया समेत दूसरे अखबारों ने प्रमुखता के साथ राकेश चतुर्वेदी के हवाले से इस बारे में खबरें प्रकाशित की. चतुर्वेदी का कहना था कि केंद्र सरकार की योजना के तहत जमीनी काम शुरु भी किया गया है. इसके अलावा अपर्याप्त बजट के कारण राज्य सरकार ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए से योजना को पूरा करने के लिये और अधिक पैसे की भी मांग की है.

राकेश चतुर्वेदी का कहना है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने डेढ़ साल पहले सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व ‘इन सीटू ब्रीडिंग प्रोजेक्ट’ को मंजूरी दी थी, लेकिन नक्सलियों की दहशत के कारण कर्मचारी ग्राउंड रिपोर्ट ही तैयार नहीं कर पा रहे हैं. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के मेंबर सेक्रेटरी राजेश गोपाल ने सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व को मंजूरी दी थी. लेकिन सब कुछ नक्सलियों के कारण अटका हुआ है.

छत्तीसगढ़ खबर से बातचीत में राकेश चतुर्वेदी कहते हैं- “टाइगर ब्रीडिंग को लेकर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से सैद्धांतिक सहमति पहले ही मिल चुकी है लेकिन नक्सलियों के कारण कुछ हो नहीं पा रहा है.”

लेकिन उनके इस दावे से उलट राज्य के सीसीएफ वाइल्ड लाइफ अनूप श्रीवास्तव पूरे मामले से ही अनभिज्ञ हैं. अनूप श्रीवास्तव का कहना है कि उनकी जानकारी में टाइगर ब्रीडिंग की ऐसी कोई योजना कभी सामने नहीं आई है और ना ही इससे संबंधित कोई फाइल कहीं लंबित है.

इस मामले में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए के डीआईजी एसपी यादव से हमने विस्तार से पूरी योजना के बारे में जानना चाहा. श्री यादव का जवाब था- “सीतानदी-उदंती में ऐसी कोई योजना नहीं थी.”

सीसीएफ वाइल्ड लाइफ अनूप श्रीवास्तव और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के डीआईजी एसपी यादव के इंकार के बाद अब लाख टके का सवाल है कि सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व के फिल्ड डायरेक्टर राकेश चतुर्वेदी ने टाइगर ब्रीडिंग की योजना कहां और कब बना ली? इस सवाल का जवाब हमने राकेश चतुर्वेदी से ही जानना चाहा लेकिन कई बार की कोशिश के बाद पता चला कि वे रोटरी की किसी जरुरी बैठक में व्यस्त हैं.

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