केंद्र ने माना सुकमा नक्सल प्रभावित जिला

Monday, April 15, 2013

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माओवादी

दंतेवाडा़ | विशेष संवाददाता: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिले सुकमा को केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान यानी आईएपी में शामिल किया जा सकता है. कैबिनेट सेक्रेटरी अजीत सेठ ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश को पत्र लिखकर सूचित किया है कि इस योजना के लिए सुकमा को समीक्षा करने के बाद एक अलग जिले के रूप में मान्यता दी जा सकती है.

दरअसल पिछले साल जनवरी में दंतेवाड़ा जिले से अलग हुए सुकमा को अभी तक इस योजना के लिए दंतेवाड़ा का ही भाग माना जाता है जिस वजह से उसे दंतेवाड़ा को मिले फंड का कुछ भाग ही प्राप्त होता है.

इससे पहले पिछले साल जून माह में ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने सुकमा को इस फेरहिस्त में शामिल कराने के प्रयास किए थे लेकिन केंद्र सरकार ने उस समय सुकमा को नक्सल पीड़ित मानने से ही इंकार कर दिया था.

उस समय बिहार के सीतामढ़ी, पश्चिम चंपारण और मध्यप्रदेश के सिगरौली और गैर-नक्सल प्रभावित इलाके छिंदवाड़ा को भी इसमें शामिल कर लिया गया था. सुकमा को न शामिल किए जाने से नाराज़ जयराम रमेश ने मामले को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और योजना आयोग के अध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया के समक्ष भी उठाया था.

अब केंद्र सरकार ने माना है कि सुकमा नक्सल हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित देश के 26 जिलों में शामिल है. अगर सुकमा को आईएपी जिलों में शामिल किया जाता है तो उसे योजना के तहत जिले के अधोसंरचनात्मक विकास के लिए 30 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष दिए जाएंगे.

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