छत्तीसगढ़: सिकलसेल एनीमिया बढा

Tuesday, October 20, 2015

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सिकलसेल

रायगढ़ | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के बरमकेला में 3700 बच्चों के परीक्षण में 600 सिकल सेल एनीमिया के नये मरीज मिले हैं. इससे इस बात का संकेत मिलता है कि छत्तीसगढ़ में सिकल सेल एनीमिया की आनुवांशिक बीमारी पैर पसार रही है. अब तक रायगढ़ में 2400 बच्चों में परीक्षण के बाद इस बीमारी के 1078 मरीज मिले हैं.

उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिविर लगाकर इस बीमारी की जांच की जा रही है.

भारत में सिकल सेल मुख्य रूप से छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, झारखण्ड, महाराष्ट्र,गुजरात, आंध्रप्रदेश,तेलंगाना, केरल, कर्नाटक एवं कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में पाया जाता है. छत्तीसगढ़ में सिकल सेल जीन की प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यह छत्तीसगढ़ की लगभग 10 प्रतिशत Sickle Cell1आबादी में फैला हुआ है. हालांकि कुछ जातियों में यह 30 प्रतिशत तक देखा गया है.

सिकलसेल एनीमिया
यह लाल रक्त कोशिकाओं से जुड़ा एक रोग होता है. सिकल सेल होने के बाद लाल रक्‍त कोशिकाओं में हिमोग्‍लोबिन वहन करने की क्षमता खत्म हो जाती है. इससे शरीर में रक्त की कमी होने लगती है. लाल रक्त कोशिकाएं, अस्थि-मज्जा में बनती हैं और इनकी औसत आयु 120 दिन होती है. सिकल सेल लाल रक्त कोशिकाएं का जीवन काल केवल 10-20 दिनों का होता है और अस्थि मज्जा उन्हें तेजी से पर्याप्त मात्रा में बदल नहीं पाती हैं. नतीजन शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की समान्य संख्या और हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है.

इलाज
सिकल सेल एनीमिया का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है. हालांकि रोग की जटिलताओं के और एनीमिया के उपचार से रोगियों में लक्षण और रोग की जटिलताओं को कम किया जा सकता है. रक्त मज्जा और स्टेम सेल प्रत्यारोपण के द्वारा सीमित लोगों का इलाज किया जा सकता है. सिकल सेल एनीमिया हर व्यक्ति में भिन्न होता है. कुछ लोगों को दीर्घावधि दर्द या थकान होती है. हालांकि स्वास्थ्य की गुणवत्ता में सुधार, उचित देखभाल और उपचार के द्वारा रोगियों के जीवन में सुधार लाया जा सकता हैं. सिकल सेल एनीमिया के कई रोगी ऐसे भी हैं जो उचित उपचार और देखभाल की वजह से चालीसवें/पचासवें वर्ष या उससे अधिक आयु में भी जीवन व्यतीत कर रहे हैं. इस रोग के मरीजों को रक्त बढ़ाने वाली दवायें दी जाती हैं तथा कईयों को नियमित तौर पर रक्त लेना पड़ता है.

रोगी की पहचान
शारीरिक विकास में अवरूद्धता, वजन और उँचाई सामान्य से कम
सामान्य कमजोरी की शिकायत के साथ कमजोर शरीर
अत्यधिक खून की कमी और गंभीर एनीमिया
पीली त्वचा, रंगहीन नाखून
त्वचा एवं आंखों में पीलापन
फ्लैट बोन (माथे की)
सतत्‌ हल्का बुखार एवं दीर्घकालिक बुखार का रहना
सांस लेने में तकलीफ/छोटी-छोटी सांस लेना
सामान्य से अधिक थकावट
बार-बार पेशाब जाना, मूत्र का गाढ़ापन
हडि्‌डयों और पसलियों में दर्द
चिड़चिड़ापन हाथ और पैरो में सजू न
प्रायपिज्म (priapism)
बांझपन
बार-बार वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण

छत्तीसगढ़ राज्य सरकार का संयुक्त प्रयास
इस रोग से जुड़ी पीड़ा और कठिनाई को देखते हुये छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2013 में सिकल सेल रोग के निदान के लिये समर्पित ‘सिकल सेल संस्थान छत्तीसगढ़ की स्थापना रायपुर में की है. यह संस्थान,रोगियों और उनके परिवार के सदस्यों के लिये विशेष उपचार एवं परामर्द्गा की सुविधा निशुल्क प्रदान करता है. साथ ही यह संस्थान, सिकल सेल रोगियों के उपचार एवं चिकित्सा के लिये आवश्यक, प्रशिक्षित चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये, राज्य के स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करता है.

हालांकि विश्व में सिकल सेल रोगियों की कुल संख्या में भारत का योगदान बहुत ज्यादा है, फिर भी विविधता पूर्ण भारतीय आबादी में बहुत कम शोध कार्य किये गये हैं. यह रोग मुख्यतः अफ्रीका, भारत एवं अन्य अविकसित एवं विकासशील देशों में पाया जाता है, जिसके कारण विकसित देशों ने इस रोग को नजरअंदाज किया है.

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