छत्तीसगढ़: गर्भवती को पौष्टिक आहार

Wednesday, May 4, 2016

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महतारी जतन योजना- छत्तीसगढ़

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में करीब 2.50 लाख गर्भवतियों को महजारी जतन योजना का लाभ मिलेगा. उसकी शुरुआत मुख्यमंत्री रमन सिंह ने मंगलवार को कोरिया जिले से शुरु की. इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ की गरीब गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक भोजन निशुल्क प्रदान किया जायेगा. पूर्व में भी छत्तीसगढ़ के चोटे बच्चों को कुपोषण से बचाने मीठा दूध दिया जा रहा है. उल्लेखनीय है गर्भाअवस्था के समय यदि माता को पौष्टिक भोजन नहीं मिलता हौ तो वह रक्त अल्पता की शिकार हो जाती है. जिससे प्रसव के दौरान मौत का डर बना रहता है. माता के पौष्टिक आहार लेने से बच्चें का गर्भ में तथा प्रसव के बाद विकास अच्छा होता है.

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि आम जनता की बेहतरी के लिए ठोस योजनाएं वातानुकूलित कमरों में नहीं, बल्कि जनता के बीच सभी लोगों से चर्चा करके ही बन सकती हैं. उन्होंने कहा कि ग्राम सुराज और लोक सुराज जैसे अभियानों में हमने गांवों में आम, बरगद, पीपल और इमली के पेड़ के नीचे बैठकर लोगों की जरूरतों का आंकलन करके किफायती चावल, चना, निःशुल्क नमक वितरण, कुपोषण से मुक्ति के लिए पोषण आहार वितरण और समर्थन मूल्य पर लघु वनोपजों की खरीदी जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं बनायी है, जिनका लाभ सभी जरूरतमंद परिवारों को मिल रहा है.

डॉ. रमन सिंह ने मंगलवार दोपहर लोक सुराज अभियान के तहत कोरिया जिले के ग्राम सलगंवाकला (विकासखंड सोनहत) में प्रदेश के आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए मुख्यमंत्री महतारी जतन योजना का शुभारंभ करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए. उन्होंने महिलाओं को अपने हाथों से पौष्टिक भोजन परोस कर इस योजना का शुभारंभ किया.

उल्लेखनीय है कि यह योजना महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित की जाएगी. इसमें गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों में निःशुल्क ताजा और पौष्टिक भोजन दिया जाएगा. लगभग 2.50 लाख गर्भवती महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा.

मुख्यमंत्री ने शुभारंभ समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि बस्तर संभाग के जिला मुख्यालय सुकमा में लोकसुराज अभियान के अंतर्गत 29 अप्रैल को आंगनबाड़ी के बच्चों को सुगंधित और मीठा दूध वितरित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री अमृत योजना’ की शुरूआत की जा चुकी है. आज महतारी जतन योजना की शुरूआत हुई है.

इन दोनों योजनाओं के जरिये छत्तीसगढ़ में कुपोषण के खिलाफ लड़ाई और तेज हो गई है.

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