छत्तीसगढ़: मैला ढ़ोने की प्रथा का अंत

Wednesday, February 18, 2015

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सिर पर मैला ढोना

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के मुंगेली में सिर पर मैला ढ़ोने वाले 3 लोगों का पुनर्वास किया गया. इसी के साथ राज्य से सिर पर मैला ढ़ोने की प्रथा समाप्त हो गई है. उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2014 में सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता राज्य मंत्री विजय साम्पला ने लोकसभा में इसकी जानकारी दी थी कि छत्तीसगढ़ में 3 लोग सिर पर मैला ढ़ोते हैं. हालांकि लोकसभा में पेश किये गये आकड़ों के अनुसार देश में सिर पर मैला ढोने वाले छत्तीसगढ़ में सबसे कम 3 तथा उत्तरप्रदेश में सबसे ज्यादा 10,016 थे.

छत्तीसगढ़ के आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री केदार कश्यप द्वारा बुधवार को नई दिल्ली में दी गई जानकारी से इसका खुलासा हुआ.

छत्तीसगढ़ के आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार हाथ से मैला ढुलाई की अमानवीय को पूर्ण रूप से समाप्त करने के लिए वचनबद्ध है . केदार कश्यप बुधवार को नई दिल्ली में मैनुअल स्केवेंजर एक्ट 2013 के क्रियान्वयन के लिए केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित राज्यों के मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे .

केदार कश्यप ने कहा कि इस संबंध में बनाए गए हाथ से मैला ढुलाई के रूप में रोजगार के नियोजन का प्रतिषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम 2013 का प्रभावी क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ में किया जा रहा है. सम्मेलन में केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गेहलोत भी उपस्थित थे.

केदार कश्यप ने सम्मेलन में बताया कि अस्वच्छ शौचालयों के सर्वेक्षण का कार्य छत्तीसगढ़ के सभी 169 नगरीय निकायों में किया गया है तथा चार हजार 391 अस्वच्छ शौचालय चिन्हांकित किए गए हैं. इनमें से दिसम्बर 2014 तक तीन हजार 184 अस्वच्छ शौचालयों को स्वच्छ शौचालयों में परिवर्तित किया जा चुका है. शेष अस्वच्छ शौचालयों को मार्च 2015 तक स्वच्छ शौचालयों में परिवर्तित करने का लक्ष्य रखा गया है.

मैनुअल स्केवेंजर्स के पुर्नवास का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में मुंगेली नगरपालिका में 3 मैनुअल स्केवेंजर्स पाए गए थे. जिन्हें इस अमानवीय कार्य से मुक्त कर उनका पुनर्वास किया गया है.

इनमें से प्रत्येक को 40 हजार रूपये की वित्तीय सहायता राष्ट्रीय सफाई कामगार वित्त एवं विकास निगम के द्वारा दी गयी है. इसके साथ ही उन्हें वैकल्पिक रोजगार मुंगेली नगर पालिका में उपलब्ध कराया गया है.

छत्तीसगढ़ के मंत्री केदार कश्यप ने यह भी बताया कि खुले में शौच की प्रथा को 2016 तक छत्तीसगढ़ के नगरीय क्षेत्रों से समाप्त करने के लिए राज्य शासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है . इस हेतु प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच की प्रथा को समाप्त करने के लिए निर्मल भारत अभियान के तहत ग्रामों में पक्के शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है

उन्होंने बताया कि खुल में शौच की प्रथा रोकने के लिए लोगो को जागरूक बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है.

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