छत्तीसगढ़: कुपोषण के शिकार आदिवासी

Thursday, September 8, 2016

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आदिवासी

काकेंर | विशेष संवाददाता: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के आदिवासी समुदाय में कुपोषण गहरा रहा है. पिछले कुछ सालों में कुपोषण को बढ़ावा देने वाली स्थितियां बनी है. आदिवासियों के निवास क्षेत्रों जल, जंगल, जमीन और परंपरागत आजीविका के स्रोतों पर आये संकट के कारण अब ये समुदाय आजीविका तथा खाद्य व पोषण सुरक्षा की गंभीर चुनौती का सामना कर रहे हैं. इस चुनौती से पार पाने के रास्ते केवल शासकीय योजनाओं में ही ढूढनें की कोशिशें की जा रही हैं.

कुपोषण को बढ़ाने व इसे कायम रखने वाले कारणों को खत्म करने या कम करने के उपायों पर जोर नहीं दिया जा रहा हैं. केंद्र सरकार द्वारा कुपोषण मिटाने के लिए पोषण पुनर्वास योजना सहित तमाम प्रयास करने के दावें किये जा रहें है, बावजूद इसके कुपोषण रोकने जिला प्रशासन नाकाम साबित होता दिख रहा है. बच्चों और महिलाओं में कुपोषण एक संवेदनशील मुद्दा है. लेकिन कुपोषण से जंग लड़ने के सरकारी प्रयास कागजों पर कितने भी शानदार दिखते हो मगर जमीन पर हकीकत कुछ और है.

आमाबेड़ा से महज पांच किलो मीटर दूर बड़ेतेवड़ा गांव है. इस गांव में आदिवासियों के कच्चे मकान नजर आयेंगे. या फिर पेट निकले आदिवासियों के कुपोषित बच्चे दिखेंगे. अमूमन, यह स्थिति पूरे जिले की है. लेकिन, इस गांव के बच्चों तथा महिलाओं में कुपोषण को जानने-समझने के लिए किसी सरकारी आँकड़े की जरूरत नहीं है.

आदिवासी समुदाय की सुशीला आचला गरीबी और गुमनामी में जी रहीं है. हालांकि सरकार ने इनके लिए बुनियादी सुविधाओं का प्रावधान किया है. लेकिन सुशीला और उसके जैसे कई आदिवासियों से बात करके पता लगता है कि ये लोग सरकारी योजनाओं से अनजान हैं.

सुशीला कहतीं है कि बीतें दो साल से उसका बच्चा कुपोषण का शिकार है, और उसके इलाज के लिए शासन-प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है. सुशीला कहती है कि सरकार हमारा ठीक से पालन-पोषण करें, और बेहतर इलाज की व्यवस्था करायें.

अर्रा सेक्टर की प्रभारी शकुंतला श्रीवास्तव ने बताया कि अंतागढ़ एनआरसी केंद्र में जगह फुल होने के कारण कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए भर्ती नहीं कराया गया है. एऩआरसी सेंटर में जगह खाली होते ही कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए भेज दिया जायेगा.

उन्होंने कहा कि बच्चों के अभिभावक नशा करने के आदि होने के कारण बच्चों का सही तरीके से देखभाल नहीं करते है. इसके साथ ही परिवार नियोजन के उपायों को नहीं अपनाते है.

आमाबेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक गौतम बघेल कहते है कि महिलाओं में कुपोषण बढ़ने की प्रमुख वजह खून की कमी है, गर्भवती महिलायें महुआ शराब तथा तंबाकू का सेवन करती है. महिलाओं को खाने के लिए आयरन की गोली दी जाती है लेकिन बे-स्वाद होने के कारण महिलाएं दवाई लेने से परहेज करतीं है.

एनआरसी फुल, कुपोषित बच्चों के लिये जगह नहीं
अर्रा इलाके में करीब 18 गांवों के 29 गंभीर कुपोषित तथा 145 मध्यम कुपोषित बच्चों को इलाज नहीं मिल पा रहा हैं. अंतागढ़ एनआरसी सेंटर में जगह फुल होने के कारण कुपोषित बच्चें इलाज के लिए तरस रहें है. जिलें से कुपोषण का कलंक मिटाने का दावा करने वाला प्रशासन इन बच्चों के बेहतर इलाज के लिए ध्यान नहीं दे रहा है.

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