छत्तीसगढ़ में 40लाख रसोई धुए वाली

Saturday, January 10, 2015

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लकड़ी का चूल्हा

रायपुर | विशेष संवादाता: छत्तीसगढ़ में 40लाख परिवारों तक रसोई गैस नहीं पहुंच सका है. उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में करीब 56लाख परिवार हैं जबकि केवल 16लाख रसोई गैस के कनेक्शन हैं. जिन्हें 302 रसोई गैस के वितरकों के माध्यम से वितरित किया जाता है.

छत्तीसगढ़ में 16लाख रसोई गैस के उपभोक्ता हैं यह दावा हमारा नहीं अपितु छत्तीसगढ़ सरकार के विज्ञप्ति से जाहिर होता है.

इसे दूसरी तरह से भी समझा जा सकता है. जनगणना 2011 के अनुसार छत्तीसगढ़ की आबादी 2.55 करोड़ है जबकि रसोई गैस के उपभोक्ता 16लाख हैं. इस प्रकार से रसोई गैस के 1 सिलेंडर से 15.93 लोगों का खाना बनता है. जाहिर है कि छत्तीसगढ़ में रसोई गैस के उपभोक्ताओं की संख्या कई गुना ज्यादा होनी चाहिये थी.

आम तौर पर यह देखा गया है कि कई शहरी परिवारों में दो-दो रसोई गैस के कनेक्शन हैं क्योकि वे पुत्र का अलग परिवार दर्शाकर पृथक कनेक्शन ले लेते हैं. उसके बाद भी हम मान कर चल रहें हैं कि छत्तीसगढ़ के एक परिवार के पास एक ही रसोई गैस का कनेक्शन है. इसके अनुसार छत्तीसगढ़ के 16लाख परिवारों के पास रसोई गैस का कनेक्शन हुआ. अतः बाकी के बचे 40लाख परिवार खाना बनाने में रसोई गैस का उपयोग नहीं करते हैं.

नतीजा तो यही निकलता है कि छत्तीसगढ़ के 40लाख परिवार अपना खाना लकड़ी तथा कोयले से पकाते हैं. जिससे रसोई घर में धुआ भर जाता है. दूसरी तरफ एक रुपये किलो चावल लेने के लिये 70लाख राशन कार्ज बनवाये गये थे. जाहिर है कि छत्तीसगढ़ में राशन कार्ड बनवाना आसान है रसोई गैस का कनेक्शन लेना मुहाल.

यह बात अपनी जगह पर ठीक है कि एक रुपया किलो चावल बीपीएल परिवारों के लिये है. इसके बाद भी तो इन चावलों को पकाने के लिये लकड़ी या कोयले से आग जलाना पड़ता है.

यही बात तो हम कह रहें हैं कि छत्तीसगढ़ में 40लाख परिवारों के 40लाख रसोई धुए से भरी रहती है.

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