लंबूराम की मौत भूख से: कांग्रेस

Thursday, October 29, 2015

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पत्रकार वार्ता

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: दिल्ली मुख्यालय में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ के जशपुर में लंबूराम की मौत भूख से हुई है. कांग्रेस मुख्यालय में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल तथा नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने यह बात कही तथा वे लंबूराम के परिवार के साथ राष्ट्रपति से भी मिलने वाले हैं. उल्लेखनीय है कि लंबूराम पहाड़ी दुर्लभ कोलवा जनजाति का था जिन्हें राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र कहा जाता है. संरक्षित जनजातियों को भारत के राष्ट्रपति से सीधा संरक्षण प्राप्त होता है.

छत्तीसगढ़ के कांग्रेसी नेताओं ने कहा, “एक ओर तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अच्छे दिन का वादा कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि भाजपा शासित राज्यों ने विकास के नए पैमाने गढ़े हैं लेकिन दूसरी ओर संरक्षित जनजाति का एक व्यक्ति भूख से मर रहा है.” उन्होंने कहा कि इस एक मौत ने रमन सिंह सरकार और केंद्र सरकार दोनों के विकास के दावों की कलई खोल दी है.

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि छत्तीसगढ़ के जशपुर के एक गांव में रहने वाले लंबू राम के परिवार के पास एक राशन कार्ड जरूर है लेकिन इस कार्ड में लंबू राम का नाम दर्ज नहीं है. पत्रवार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि लंबू राम की मां के नाम से जारी यह राशन कार्ड बना तो 2014 में है क्योंकि इसमें वर्तमान सरपंच के दस्तखत हैं जो 2014 में ही निर्वाचित हुए हैं. लेकिन इसमें राशन लेने की तिथि 2013 की दर्ज है और मात्र दस किलो चावल दिया गया है. जबकि गुलाबी राशनकार्ड धारी लंबू राम की मां बिफनी अत्यंत गरीब परिवार से है और हर माह 35 किलो अनाज पाने की हकदार हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए वाहवाही लूटने वाली रमन सिंह की सरकार ने इसमें भी खूब लीपापोती की है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि इस व्यक्ति के पास स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मिलने वाला स्मार्ट कार्ड भी नहीं था और न ही आधार कार्ड और न ही वनाधिकार पट्टा इत्यादि. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संरक्षित जनजाति के लोगों के साथ इसी तरह का व्यवहार कर रही है.

उन्होंने कहा कि खबर मिलने के बाद वे खुद लंबू राम के गांव गए थे और उन्होंने पाया कि गांव के 8-10 घरों में से किसी में भी अन्न उपलब्ध नहीं था जबकि नियमानुसार हर परिवार हर माह कम से कम 35 किलो चावल पाने का हकदार है. उन्होंने बताया कि पहाड़ी कोरवा आदिवासी परिवार के लोग कंदमूल खाकर जीवन बसर कर रहे हैं. दोनों कांग्रेस नेता इस मामले को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाकात करने वाले हैं.

यह पूरा वाकया छत्तीसगढ़ के जशपुर नगर में बगीचा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले केलेदरागढ़ा का है. परिवार का मुखिया लंबू राम लकड़ी बेचकर अपने परिवार का खर्च चलाता था. किसी तरह उसके परिवार का गुजर-बसर चल रहा था. सितम्बर महीने उसकी पत्नी सुखनी बाई की बांयी आंख में एक फुंसी हो गई. ईलाज के अभाव में सुखनी की आंखे धंसने लगी थी और लंबू के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वह उसका ईलाज करवा पाए. आखिरकार उसने हिम्मत बांधकर अपनी पत्नी का ईलाज करवाने की ठानी और 9 सितम्बर को उसे लेकर गांव से दूर प्राथमिक उपचार केंद्र पहुंचा.

वहां सुखनी को रोजाना इंजेक्शन दिया जा रहा था और कम दिखने के कारण उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य के आसपास की झोपड़ियों में रात बिताने लगे. यह सिलसिला 12 सितम्बर तक चलता रहा. लंबू राम की पत्नी का कहना है कि इलाज के दौरान लंबू किसी तरह आसपास से उसके लिए खाने का इंतजाम तो कर देता था लेकिन खुद बिना खाए ही रह जाता था.

उसकी पत्नी ने जो किस्सा बयान किया उसके अनुसार लंबू राम को उसके कुर्बानी की सजा 12 सितम्बर को घर वापस लौटते समय मिली. उस दिन घर वापसी के दौरान लेदरागढ़ा से पांच किमी पहले खूटाटांगर गांव में वह भूख की वजह से तड़पने लगा और कुछ ही देर में वहीं दम तोड़ दिया. उसकी पत्नी का कहना है कि वह यह सब अपने आंखों सामने होता देखती रही लेकिन वह कर भी क्या सकती थी?

उधर, छत्तीसगढ़ सरकार ने रायपुर में कहा है कि जशपुर जिले के बगीचा विकासखण्ड के ग्राम लेदरापाठ (ग्राम पंचायत सन्ना) निवासी पहाड़ी कोरवा समुदाय के लम्बूराम की मौत भूख से नहीं हुई है. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने जशपुर कलेक्टर को दी गई रिपोर्ट में बताया है कि मृतक लम्बूराम को पत्नी के इलाज के दौरान सन्ना के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र परिसर में नाश्ता और भोजन करते देखा गया था. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार उनकी मृत्यु किसी आंतरिक बीमारी अथवा अन्य कारणों से हुई है.

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