बीएसपी में कार्बन मोनोऑक्साइड से हुई थीं मौतें

Wednesday, June 25, 2014

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भिलाई स्टील प्लांट

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ के बीएसपी में 12 जून को हुए गैसकांड के दौरान हुई सभी 6 मौतें कार्बन मोनोऑक्साइड के कारण हुई थीं. गैसकांड में मृत लोगों की रायपुर में हुई खून की जांच में यह खुलासा हुआ. खून में 80 फीसदी कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा पाई गई. खून की जांच रिपोर्ट पुलिस प्रशासन को मिल गई है.

छत्तीसगढञ के भिलाई नगर सीएसपी और बीएसपी हादसे की जांच कर रही पुलिस टीम के प्रमुख वीरेंद्र सत्पथी ने बताया कि गैसकांड में मृत सभी छह लोगों के खून का नमूना रायपुर की फोरेसिंक लैब भेजा गया था. जहां खून के नमूनों की जांच कर रिपोर्ट तैयार हो गई है. जांच में स्पष्ट हुआ है कि बीएसपी में हादसे के दौरान अत्यधिक मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस शरीर के अंदर चली गई और यही छह लोगों की मौत का कारण बनी.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हुई जांच में इसका खुलासा हो गया है कि मृत सभी 6 लोगों के खून में 80 फीसदी कार्बन मोनो ऑक्साइड पाया गया जो इनकी मौत का कारण बना.

सीएसपी सत्पथी ने बताया कि लैब के वैज्ञानिकों के अनुसार कार्बन मोनोऑक्साइड बेहद खतरनाक गैस है. जब बीएसपी में गैस रिसाव हुआ और इसकी चपेट में आए लोगों के खून में सांस द्वारा कार्बन मोनोऑक्साइड घुल गया.

उन्होंने बताया कि कार्बन मोनोऑक्साइड खून के हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर हीमोग्लोबो मोनो ऑक्साइड बनाता है. इस स्थिति में मरीज को अत्याधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है. छत्तीसगढ़ के बीएसपी गैस कांड में सभी मृतकों के साथ भी यही हुआ था. खून की जांच में 80 फीसदी हीमोग्लोबो मोनो आक्साइड की मात्रा पाई गई.

बीएसपी हादसे की जांच के संबंध में सतपथी ने बताया कि पुलिस की जांच अभी जारी है. उन्होंने कहा, “हमने बीएसपी के सुरक्षा विभाग से पंप हाउस में कार्य कर रहे ठेकेदार की जानकारी मांगी थी. जानकारी मिलने के बाद दोनों ठेकेदारों को नोटिस जारी कर उनके पास कार्यरत सभी श्रमिकों की लिस्ट मंगाई गई है.”

सतपथी ने बताया कि हादसे के दिन एक ठेकेदार के 17 कर्मचारी व दूसरे ठेकेदार के 53 कर्मचारी काम कर रहे थे. इन सभी कर्मचारियों के नाम पते के साथ मंगाया गया है.

जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन जे.पी. मोम का कहना है कि कार्बन मोनोऑक्साइड बेहद घातक है. इंसानी शरीर में यह प्रवेश कर जाए तो खतरा ही रहता है. इंसानी शरीर में अधिकतम 40 फीसदी तक गैस पहुंचे तो एक बार उम्मीद की जा सकती है कि उसे बचाया जा सकता है. खून में 80 फीसदी कार्बन मानो ऑक्साइड गैस प्रवेश कर जाए तो व्यक्ति का जीवित रहना नामुमकिन है.

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