रिश्वतखोरी रोकने सरकारी संधि

Tuesday, July 9, 2013

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रायपुर | विशेष संवाददाता: सरकारी महकमे में रिश्वतखोरी से परेशान छत्तीसगढ़ सरकार ने एक नया प्रयोग शुरु किया है. सरकार ने रिश्वतखोरी रोकने के लिये सरकारी खरीदी, ठेका, निर्माण और नीलामी के क्षेत्र में सत्य निष्ठा संधि लागू की है. इस संधि के अनुसार सरकारी खरीद-बिक्री करने, नीलामी करने और बोली लगाने वाले व ठेका लेने और देने वाले को इस सत्य निष्ठा संधि पर हस्ताक्षर करना होगा.

इस सत्य निष्ठा संधि में कहा गया है कि दोनों पक्ष अनुबंध हासिल करने के लिए प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से न तो रिश्वत लेंगे और न ही रिश्वत देंगे और न ही किसी भ्रष्ट माध्यम का सहारा लेंगे.

वित्त और योजना विभाग के अपर मुख्य सचिव डी.एस. मिश्रा का कहना है कि सरकार इस संधि के द्वारा प्रोक्योरमेंट की प्रक्रिया को और स्वच्छ और पारदर्शी बनना चाहती है, जिससे उसमें गुणवत्ता भी सुनिश्चित हो.

लेकिन विपक्षी दल कांग्रेस सरकार के इस कदम को हास्यास्पद बता रहा है. कांग्रेस के प्रवक्ता शैलेष नीतिन त्रिवेदी कहते हैं- “छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है. होना तो यह चाहिये था कि सरकार में शामिल नेता और नौकरशाह अपना चरित्र बदलते लेकिन इसके उलट सरकार इस तरह की हास्यास्पद संधि लागू कर रही है.”

सरकारी संधि
राज्य में सैकड़ों करोड़ के घोटाले और रिश्वतखोरी की खबरों के बीच पिछले महीने मुख्यमंत्री रमन सिंह के मंत्रिमंडल ने फैसला लिया था कि राज्य सरकार के ठेका, निर्माण जैसी प्रक्रियाओं को और पारदर्शी बनाया जाये. इसी के तहत सरकार ने राज्य भर में सत्य निष्ठा संधि को लागू करने का आदेश जारी किया है.

इस आदेश के अनुसार सत्य निष्ठा संधि राज्य के सरकार के समस्त विभागों, अधीनस्थ कार्यालयों, निगम-मण्डलों, निकायों और सार्वजनिक उपक्रमों में लागू होगी. इसे सामग्री और सेवा के प्रोक्योरमेन्ट, सरकारी नीलामी तथा निर्माण कार्यों से संबंधित निविदाओं में एक परिशिष्ट के रूप में शामिल करना होगा. सत्य निष्ठा संधि सार्वजनिक क्षेत्र के क्रेता और निजी क्षेत्र के विक्रेता या बोलीदार के बीच बोली और अनुबंध के पहले की जानी वाली एक प्रकार की सहमति के रूप में होगी.

इस संधि द्वारा दोनों पक्ष यह मान्य करेंगे कि सरकारी खरीद-बिक्री में किसी भी स्तर पर अनुबंध हासिल करने के लिए प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से न तो रिश्वत लेंगे और न ही रिश्वत देंगे और न ही किसी भ्रष्ट माध्यम का सहारा लेंगे.

पर्यवेक्षक भी
सत्य निष्ठा संधि का पालन सुनिश्चित करने के लिए इसमें स्वतंत्र बाहरी पर्यवेक्षकों का भी प्रावधान किया गया है, जो इस व्यवस्था की निगरानी करेंगे. इन स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों जैसे परियोजना प्रस्ताव के निर्माण, बोली की प्रक्रिया, अनुबंध प्रदान करना और निर्माण के समय प्रक्रिया से संबंधित अभिलेखों और सूचनाओं के अवलोकन का भी अधिकार होगा.

किसी मामले में अगर प्रोक्योरमेंट की प्रक्रिया पर अनुचित व्यवहार का प्रभाव होने की सूचना मिलेगी तो ये स्वतंत्र पर्यवेक्षक राज्य सरकार के सक्षम अधिकारी को अपनी रिपोर्ट भेज सकेंगे. स्वतंत्र पर्यवेक्षकों के रूप में शासन या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों को नियुक्त किया जाएगा.

जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश अध्यक्ष आनंद मिश्रा का कहना है कि इस तरह की संधि का मतलब ही है कि सरकार ने राज्य में भ्रष्टाचार की चरम स्थिति को स्वीकार कर लिया है.

श्री मिश्रा कहते हैं-“ राज्य में सरकारी रिश्वतखोरी के हजारों मामले थाना, अदालत और आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो में अटके हुये हैं. हालत ये है कि राज्य सरकार रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामले में पिछले कई सालों से अफसरों पर कार्रवाई करने की अनुमति नहीं दे रही है. ऐसे में इस तरह की संधि को जनता की आंख में धूल झोंकने वाला ही माना जा सकता है.”

क्या है सत्य निष्ठा संधि में

  • यह सार्वजनिक क्षेत्र के क्रेता को जो सामग्री आपूर्ति, लोक निर्माण, परामर्श या किसी सेवा अनुबंध, शासकीय नीलामी के लिए खुली निविदा आमंत्रित करते हैं तथा निजी क्षेत्र के प्रतिभागी जो निविदा प्रस्तुत करते हैं; के बीच यह संधि की जाएगी.
  • इसमें सार्वजनिक क्षेत्र का क्रेता यह वचन देगा कि उसके अधिकारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी रूप में रिश्वत अथवा उपहार की मांग नहीं करेंगे और न प्राप्त करेंगे तथा उनके द्वारा उल्लंघन की स्थिति में वे समुचित दण्ड के भागी होंगे. सभी बोलीदाता यह वचन देंगे कि संदर्भित अनुबंध या निविदा के लिए उन्होंने रिश्वत नहीं दिया है और न ही देंगे तथा उल्लंघन की स्थिति में समुचित सजा के भागीदार होंगे.
  • सत्य निष्ठा संधि के अन्तर्गत सभी बोलीदाता यह भी वचन देंगे कि उनके द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि अथवा एजेंट, विदेशी प्रमुख या सहयोगी के नाम और पते का तथा उन्हें किए गए सभी भुगतानों का खुलासा किया जाएगा.
  • बोलीदाता द्वारा बोली अथवा बिड प्रस्तुत करते समय या अनुबंध के पहले किसी भी स्तर पर क्रेता के अधिकारी, उसके परिवार या किसी प्रतिनिधि को किए गए किसी भी प्रकार के भुगतान और बदले में प्राप्त की सेवा की जानकारी उपलब्ध कराना होगा. बोलीदाता यह भी वचन देगा कि प्रस्तावित दर से कम दर पर उसने समरूप उत्पाद हाल ही में किसी अन्य संस्था को उपलब्ध नहीं कराया है.
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