छत्तीसगढ़: अभिजीत का ‘बेसुरा राग’

Saturday, February 6, 2016

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अभिजीत भट्टाचार्य

जांजगीर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ आकर गायक अभिजीत ने अपना ‘बेसुरा राग’ फिर से छेड़ दिया है. उन्होंने दावा किया है कि वे ‘फेमस’ हैं इस लिये लोग उनसे ज्यादा नफरत करते हैं. पार्श्र्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य का कहना है कि वह अच्छा गाते हैं, इसलिए कुछ लोग उनसे नफरत करते हैं. ‘फेमस’ लोगों के प्रति नफरत ज्यादा होती है. आजकल जो जितना बेसुरा गा रहा है, वह उतना ही प्रसिद्ध है. उनके इस बात में भी विरोधाभास है. अभिजीत भले ही खुद को गायन के लिए ‘फेमस’ मानें, लेकिन वह विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाते हैं. सलमान खान से जुड़े हिट एंड रन मामले की जिस दिन सुनवाई थी, उन्होंने ट्वीट किया था- ‘जो सड़क पर सोएगा, वह कुत्ते की मौत ही मरेगा.’

इस ‘फेमस’ गायक को यह नहीं पता कि सलमान की कार से जो शख्स कुचला गया, वह सड़क पर नहीं, बल्कि एक बंद दुकान की तीसरी सीढ़ी पर सोया था. बेलगाम कार सड़क छोड़कर दुकान की तीसरी सीढ़ी पर चढ़ गई थी. वैसे भी किसी गरीब-मजलूम को ‘कुत्ता’ कहना कैसी इंसानियत है फेमस गायक?

पिछले साल मुंबई में दुर्गापूजा के एक पंडाल में एक युवती के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगने पर यह फेमस गायक चर्चा में आए थे.

इसके बाद नवंबर में देश में बढ़ती ‘असहिष्णुता’ के खिलाफ साहित्यकारों, कलाकारों, वैज्ञानिकों ने जब विरोध स्वरूप अपने पुरस्कार लौटा दिए तो उनके त्याग को नजरअंदाज कर उन्हें केंद्र सरकार को बदनाम करने की साजिश रचने वाले और कांग्रेस व वामपंथी ‘राजनीति’ से प्रेरित बताने के लिए अभिजीत दा मुंबई से अनुपम खेर के साथ दिल्ली के इंडिया गेट पर पहुंच गए और राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च किया.

अफसोस कि ‘महान कार्य’ का श्रेय भाजपा सांसद किरण खेर के पति अनुपम खेर ले गए, अभिजीत दा उनके पीछे-पीछे रहे.

शिवसेना ने जब मुंबई में गुलाम अली का कार्यक्रम रद्द कराया तो अभिजीत दा ने पत्रकारों से कहा, “कौन है, क्या है गुलाम अली..हमारे यहां उससे अच्छे-अच्छे कलाकार हैं.”

कहते हैं गीत-संगीत की कोई सरहद नहीं होती, लेकिन खुद को ‘फेमस’ मानने वाले कलाकार अभिजीत सरहद पार के एक प्रसिद्ध कलाकार के प्रति मन में कितनी कड़वाहट रखते हैं, दुनिया ने देखा.

शुक्रवार की रात यहां के जाज्वल्य देव लोक महोत्सव में अपनी प्रस्तुति देने पहुंचे अभिजीत भट्टाचार्य ने कहा, “पुराने समय का गीत-संगीत बिना मसाले के, मां के हाथ से बने स्वादिष्ट खाना के समान है, जबकि वर्तमान में साफ्टवेयर की मदद से कौए के कर्कश आवाज को भी स्वरों में ढाला जा सकता है.”

पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि गीतों के क्षेत्र में परिवर्तन का दौर शुरू हो चला है. वर्तमान में प्रतिभाओं के लिए प्लेटफार्म विस्तृत हुआ है.

आपके साथ विरोधाभास की स्थिति क्यों बनती है? इस प्रश्न का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “मैं अच्छा गाता हूं, इसलिए कुछ लोग मुझसे नफरत करते हैं. फेमस लोगों के प्रति नफरत ज्यादा होता है. वर्तमान में जो जितना बेसुरा गा रहा है, वह उतना ही प्रसिद्ध है.”

इस दौर का हालांकि वह स्वागत भी करते हैं और कहते हैं कि ‘अच्छा गाने वालों की पूछ-परख बनी हुई है.’

उन्होंने छत्तीसगढ़ी फिल्म में भी गीत गाया है. भट्टाचार्य ने कहा कि उन्हें अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से ही छत्तीसगढ़ से लगाव रहा है. छत्तीसगढ़ ने अपनी संस्कृति को बनाए रखा है. वे मेले में प्रस्तुति देने जरूर पहुंचते हैं, मगर मेला देखने का सौभाग्य उन्हें नहीं मिल पाता.

उन्होंने कहा कि देश से अब मेले की परंपरा भी लुप्त हो रही है, मगर छत्तीसगढ़ में मेले अभी भी लगते हैं. अब प्रतिभाओं के लिए पर्याप्त मौका है.

भट्टाचार्य ने कहा कि उन्होंने जब गायन की शुरुआत की थी, तब कोई स्वप्न भी नहीं देख सकता था कि वह किशोर कुमार का मुकाबला करे, मगर उस दौर में भी उन्होंने संघर्ष किया और उन्हें ब्रेक मिला. आज वह इस मुकाम पर हैं.

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