छत्तीसगढ़: 93 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित

Tuesday, September 15, 2015

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महानदी भवन- मंत्रालय

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ केबिनेट ने मंगलवार को राज्य के 93 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया. इन तहसीलों में नजरी आकलन के आधार पर खरीफ की फसल 50 फीसदी से कम होने का अंदेशा है. केबिनेट के फैसले के तुरंत बाद फसलों को बचाने गंगरेल से पानी छोड़ा गया. मंत्रि-परिषद ने सबसे पहले सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि नजरी आनावारी के आधार पर 20 जिलों की 93 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित किया जाए और इसका प्रस्ताव भारत सरकार को भी भेजा जाए.

इसके अलावा अन्य तहसीलों को भी आवश्यकता अनुसार सूखा ग्रस्त घोषित करने का निर्णय समय-समय पर लिया जाएगा.

इन सभी तहसीलों की नजरी आनावारी 50 प्रतिशत से कम पायी गई है. इन तहसीलों में लगान और अन्य सरकारी व्यय की वसूली नहीं करने के संबंध में भी निर्णय लिया जाएगा.

किसानों को डीजल पम्पों के लिए दो हेक्टेयर की दर से अधिकतम दो हजार से चार हजार रूपए तक डीजल पम्प पर सब्सिडी देने का भी निर्णय लिया गया. सिंचाई पम्पों के लिए सभी अस्थायी विद्युत कनेक्शनों के आवेदन 30 सितम्बर तक स्वीकृत करने के निर्देश ऊर्जा विभाग को दिए गए.

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में गत वर्ष की तुलना में केवल 83 प्रतिशत बारिश को देखते हुए पर्याप्त जल भराव वाले सभी बांधों में उपलब्ध पानी जल उपयोगिता समितियों की अनुशंसा के आधार पर सिंचाई के लिए देने का निर्णय लिया. प्रदेश के सबसे बड़े बांगो बांध से पानी पहले ही छोड़ा जा चुका है. मंगलवार केबिनेट की बैठक में गंगरेल बांध में 121 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी की उपलब्धता को देखते हुए फसलों के लिए पानी छोड़ने का निर्णय लिया और निर्णय पर तुरंत अमल करते हुए अपरान्ह में ही गंगरेल बांध के गेट खोल दिए गए. इसके अलावा पेयजल के लिए भी पानी आरक्षित रखने का निर्णय लिया गया.

यह भी निर्णय लिया गया कि सभी 150 तहसीलों में ग्रामीणों के लिए मनरेगा आदि योजनाओं में अधिक से अधिक रोजगारमूलक कार्य खोले जाएं. मंत्रि-परिषद ने राष्ट्रीय फसल बीमा योजना का लाभ सभी किसानों को दिलाने का निर्णय लेकर इसके लिए आवेदन की अंतिम तारीख 30 सितम्बर तक बढ़ाने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजने का निर्णय लिया.

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