हम जल्दी लायेंगे काला धन- जेटली

Monday, June 23, 2014

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अरुण जेटली-वित्त मंत्री

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: काले धन की जानकारी के लिये स्विटजरलैंड को पत्र भेज रहें हैं. स्विटजरलैंड के बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा कराये गये काले धन की सूची प्राप्त करने के लिये भारत, स्विस सरकार को सोमवार को पत्र लिख रही है. इस बात की जानकारी वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दी है. गौरतलब है कि अपने चुनाव प्रचार में नरेन्द्र मोदी ने विदेशों में जमा भारतीयों के काले धन का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था तथा वादा किया था कि एक चौकीदार के रूप में वे विदेशों में जमा काले धन को वापस लायेंगे.

नई सरकार के बनने के बाद विदेशों में जमा भारतीयों के काले धन का पता लगाने के लिये केन्द्र सरकार ने एसआईटी का गठन किया. जिसके अध्यक्ष सर्वोच्य न्यायालय के अवकाश प्राप्त जस्टिस न्यायमूर्ति एमबी शाह तथा उपाध्यक्ष सर्वोच्य न्यायालय के जस्टिस अरिजीत पसायत हैं. इस एसआईटी में केन्द्र सरकार के वित्त, कर तथा अपराध की जांच करने वाले 11 महत्वपूर्ण विभागों के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं.

काले धन से तात्पर्य उस धन से है जिसे टैक्स से बचाने के लिये तथा आय के स्त्रोत को छुपाने के लिये विदेशों में जमा कराया जाता है. इसके लिये स्विटजरलैंड को सबसे मुरीद देश माना जाता है क्योंकि वहां का स्थानीय कानून इस बात की इजाजत नहीं देता है कि अकाउंट होल्डरों के नाम बताये जाये.

रविवार को खबर आई थी कि स्विस अधिकारियों ने वहां के बैंकों में धन रखने वाले भारतीयों की सूची बना ती है तथा उसे भारतीय अधिकारियों को सौंपने के लिये विचार चल रहा है. इसी बीच स्विटजरलैंड के एक बड़े अधिकारी ने मीडिया के हवाले से बताया कि “संदेह है कि इन लोगों व इकाइयों ने न्यासों, डोमिसिलिएरी कंपनियों तथा भारत से बाहर दूसरी गैरकानूनी इकाइयों के जरिये बिना कर चुकाया धन स्विस बैंकों में रखा है.” यदि ऐसा होता है तो काले धन के मालिक का नाम पता लगाना मुश्किल है.

स्विस नेशनल बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश के 283 बैंकों में विदेशी ग्राहकों का कुल जमा धन 1,600 अरब डॉलर ही है. स्विस बैंकों में जमा भारतीयों का धन बढ़कर 2.03 अरब स्विस फ्रैंक याने भारतीय संदर्भ में 14,000 करोड़ रुपये पर पहुंचने के बारे में उन्होंने कहा कि यह धन उन ग्राहकों का है जिन्होंने खुद को भारतीय घोषित किया है ऐसे में इसके गैरकानूनी धन होने की संभावना नहीं है.

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्विटजरलैंड के बैंकों में भारतीयों का कितना काला धन जमा है. उसके साथ ही उनके नाम उजागार करना पड़ेगा क्योंकि, भारतीय राजनीति में काले धन का मुद्दा इतना गर्मा चुका है कि जनता ऐसे काले धन रखने वालों का नाम जानना चाहती है. गौरतलब है कि इसी के लिये मोदी सरकार ने एसआईटी का गठन किया है कि वहां, जमा काले धन तथा उसके मालिक का पता लगाया जाये.

एक बार काले धन की सूची मिल जाने के बाद यह केन्द्र सरकार की नैतिक जिम्मेदारी बन जाती है कि उस काले धन को देश में वापस लाकर विकास के कार्यो में खर्च करें.

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