छत्तीसगढ़ में जानलेवा दवाओं से खतरा

Sunday, November 30, 2014

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'सिप्रोसीन कांड'

बिलासपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में अभी भी जानलेवा दवाओं का खतरा मंडरा रहा है. उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के महावर फार्मा द्वारा बनाई गई दवा सिप्रोसीन में चूहे मारने की दवा लैब में टेस्ट करने पर पाई गई है. हालांकि, छत्तीसगढ़ सरकार ने नसबंदी शिविरों में इस दवा से हुई मौतों के बाद इसे राज्य में प्रतिबंधित कर इसकी जब्ती कर ली थी. ज्यादातर जब्तियां सरकारी अस्पतालों से हुई थी. इस बात की पूरी संभावना है कि यह अभी भी कई स्थानों पर उपलब्ध हो, खास करके गांवों तथा झोला छाप डॉक्टरों के पास. इस कारण से छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में शासन ने दवा विक्रेताओं की मीटिंग बुलाकर उनसे इस कार्य में मदद करने के लिये कहा है.

बिलासपुर के कलेक्टर सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने शनिवार को जिले के औषधि विक्रेताओं एवं दवाईयों के थोक व्यापारियों की बैठक लेकर कहा कि प्रतिबंधित दवाईयां किसी भी हालत में वितरित न हो. यदि आपके आस-पास ऐसी दवाईयां मिलती हैं तो, उसके बारे में जिला प्रशासन को तत्काल बताएं. ताकि आवश्यक कार्यवाही की जा सके. उन्होंने कहा कि हमेशा से औषधि विक्रेताओं का सहयोग मिलते आ रहा है, उसे बनाएं रखें.

कलेक्टर ने क्षेत्र के लोगों को भी प्रतिबंधित दवाईयों के संबंध में जागरूक करने के सुझाव दिए. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रतिबंधित दवाईयों की पोस्टर दी गई है, उसे अपने मेडिकल स्टोर्स में चस्पा कराएं, ताकि प्रतिबंधित दवाईयों का उपयोग न हो. बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सक्सेना ने कहा कि क्षेत्र के झोलाछाप डाक्टरों के बारे में भी सूचित करें. जिससे की लोगों की सेहत के लिए खतरा पैदा न हो.

उन्होंने कहा कि सूचित करने वालों का नाम गोपनीय रखा जायेगा. औषधि विक्रेता संघ के अध्यक्ष ने अपने सदस्यों से कहा कि जिले में कही से भी प्रतिबंधित दवाईयां मिलती हैं तो दो दिनों के अंदर जमा करा दें. अपर कलेक्टर नीलकण्ठ टेकाम ने भी कहा कि किसी भी हालत में प्रतिबंधित दवाईयां बिकने न पाए, यह सुनिश्चित किया जाये.

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी प्रतिबंधित दवाईयों की सूची इस प्रकार है-
1) पायोडिन आयोडिन सल्यूशन आई.पी. बैच नं. ई130802 निर्माणकर्ता कंपनी माईक्रॉन फार्मा,

2) डाइजेपॉम इंजेक्शन आई.पी. बैच नं. सीडीजे/1302 निर्माणकर्ता कंपनी नंदनी मेडिकल लैब प्रा. लिमिटेड,

3) सर्जिकल स्प्रिट बैच नं. 0153ए1406 निर्माणकर्ता कंपनी यूनिजूल्स,

4) पेंटाजोसिन इंजेक्शन बैच नं. एम.14114,

5) ऐट्रोपिन सल्फेट इंजेक्शन आई.पी. बैच नं. सीएटी 1302 निर्माणकर्ता कंपनी नंदनी मेडिकल लैब प्रा. लिमिटेड,

6) एडरनालिन इंजेक्शन बैच नं. एडी 1401 निर्माणकर्ता कंपनी नंदनी मेडिकल लैब प्रा. लिमिटेड,

7) लिग्नोकेन बैच नं. 107 निर्माणकर्ता कंपनी रिगन लैब,

8) एन्टीसेपटीक लोशन बैच नं. एस 48,

9) सिप्रोसिन 500 बैच नं. 14101सीडी निर्माणकर्ता कंपनी महावर फार्मा,

10) आईबु्रफेन 400 बैच नं. टीटी 450413, टीटी 320313, एफ523एच309 निर्माणकर्ता कंपनी टेक्निका लैब,

11) टेबलेट मल्टीविटामिन बैच नं. डी63,

12) डाईक्लोफेन सोडियम इंजेक्शन., आई.पी.-25एम.जी.एम.एल. बैच नं. डी 170 निर्माणकर्ता कंपनी एडले,

13) हाईड्रोजन पैरॉकसाईट सल्यूशन बी.पी. 6 प्रतिशत बैच नं. डी 264 निर्माणकर्ता कंपनी काबरा ड्रग लिमिटेड हैं.

छत्तीसगढ़ शासन ने उक्त दवाईयों के विक्रय एवं वितरण में पूर्णतः प्रतिबंध लगाया गया है. सीजीखबर नागरिकों से आग्रह करता है कि दवा खाने के पहले दवा का नाम एवं कंपनी का नाम आवश्यक रूप से ज्ञात कर लें.

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