संघ ने छेड़ा आरक्षण समीक्षा का राग

जयपुर | समाचार डेस्क: संघ ने आरक्षण की समीक्षा की मांग की है. जयपुर साहित्य सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने आरक्षण की समीक्षा की मांग की है. ऐन उत्तरप्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य के विधानसभा चुनाव के पहले छेड़े गये आरक्षण विरोधी राग चुनाव नतीजों को कितना प्रभावित करेगा तथा विपक्ष इस मुद्दे को कहां तक हवा दे सकेगा इस पर इसका राजनीतिक पर पड़ने वाला प्रभाव निर्भर करता है.

साल 2015 में बिहार चुनाव के पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी जातिगत आरक्षण की समीक्षा की बात कही थी. उस समय विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर भाजपा को जमकर घेरा था तथा चुनाव नतीजे आने के बाद उसके सहयोगी जीतनराम मांझी ने कहा था मोहन भागवत का बयान हार की वजह बना.


जयपुर साहित्य सम्मेलन में बोलते हुए मनमोहन वैद्य ने कहा कि, “डॉ. अंबेडकर ने कहा है कि किसी भी राष्ट्र में हमेशा के लिए आरक्षण का प्रावधान रहना अच्छा नहीं है, जल्द से जल्द से इसकी आवश्यक्ता निरस्त कर सबको समान अवसर देने का समय आना चाहिये, ऐसा उन्होंने कहा है.”

उन्होंने कहा, “किसी भी राष्ट्र में हमेशा के लिए ऐसे आरक्षण की व्यवस्था का होना अच्छी बात नहीं है. सबको समान अवसर और शिक्षा मिले….यह अलगाववाद बढ़ाने वाली बात होगी.”

राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने इस बयान का विरोध किया है. उन्होंने ट्वीट के माध्यम से कहा है, “आरक्षण संविधान प्रदत्त अधिकार है. आरएसएस जैसे जातिवादी संगठन की खैरात नहीं. इसे छीनने की बात करने वालों को औकात में लाना कमेरे (मेहनती) वर्गों को आता है.”

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मनमोहन वैद्य के बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुये ट्वीट किया है, “आरएसएस ने आज फिर दोहराया कि वह आरक्षण के ख़िलाफ़ है. बीजेपी, आरएसएस और अकाली दलितों के ख़िलाफ़ हैं. किसी हालत में भाजपा को आरक्षण ख़त्म नहीं करने देंगे.”

गौरतलब है कि जयपुर साहित्य सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में वैद्य ने कहा, ”आरक्षण का विषय भारत में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिहाज से अलग संदर्भ में आया है. इन्‍हें लंबे समय तक सुविधाओं से वंचित रखा गया है. भीमराव अंबेडकर ने भी कहा है कि किसी भी सत्र में ऐसे आरक्षण का प्रावधान हमेशा नहीं रह सकता. इसे जल्‍द से जल्‍द खत्‍म करके अवसर देना चाहिये. इसके बजाय शिक्षा और समान अवसर का मौका देना चाहिये. इससे समाज में भेद का निर्माण हो रहा है.”

राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य का बयान भाजपा के लिये उत्तरप्रदेश तथा पंजाब के चुनावों में मुश्किलें पैदा कर सकता है. उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी की दंगल के बाद अखिलेश यादव का कद ऊंचा हुआ है. यदि समाजवादी पार्टी का कांग्रेस के साथ गठबंधन हो जाता है तो वैसे भी उत्तरप्रदेश का समर भाजपा के लिये आसान नहीं रहने वाला है. उस पर आरक्षण की समीक्षा की मांग कर संघ ने सभी वर्गो को साथ लेकर चलने की भाजपा की कोशिश को पतीला लगा दिया है.

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