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विनोद कुमार शुक्ल के संग्रह ‘ट्रेज़रर ऑफ पिग्गी बैंक्स’ का विमोचन

रायपुर | संवाददाता: हिंदी के शीर्ष कवि और कथाकार विनोद कुमार शुक्ल की कविताओं का अंग्रेजी अनुवाद ‘ट्रेज़रर ऑफ पिग्गी बैंक्स’ Treasurer of Piggy Banks का विमोचन गुरुवार को दिल्ली में किया गया.हिंदी से इन कविताओं का अनुवाद कवि-संपादक अरविंद कृष्ण मेहरोत्रा ने किया है.

किताब को वेस्टलैंड बुक्स ने प्रकाशित किया है.

रायपुर में रहने वाले विनोद कुमार शुक्ल की, इस संग्रह से पहले भी अंग्रेज़ी समेत दुनिया की कई भाषाओं में किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. लेकिन ताज़ा संग्रह की खासियत ये है कि इसमें श्री शुक्ल के शुरुआती संग्रह ‘वह आदमी नया गरम कोट पहिनकर चला गया विचार की तरह’ से लेकर हाल के संग्रह तक की कविताएं शामिल हैं.

1 जनवरी 1937 को राजनांदगांव में जन्में विनोद कुमार शुक्ल पिछले 50 सालों से भी अधिक समय से लिख रहे हैं. विनोद कुमार शुक्ल का पहला कविता-संग्रह ‘लगभग जयहिंद’ 1971 में प्रकाशित हुआ था.

उनके उपन्यास नौकर की कमीज, खिलेगा तो देखेंगे, दीवार में एक खिड़की रहती थी हिंदी के श्रेष्ठ उपन्यासों में शुमार होते हैं.

कहानी संग्रह पेड़ पर कमरा और महाविद्यालय भी लोकप्रिय हुये हैं.

इसी तरह लगभग जयहिंद, वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहनकर विचार की तरह, सब कुछ होना बचा रहेगा, अतिरिक्त नहीं, कविता से लंबी कविता, आकाश धरती को खटखटाता है, जैसे कविता संग्रह की कविताओं को भी दुनिया भर में सराहा गया है.

ट्रेज़रर ऑफ पिग्गी बैंक्स
ट्रेज़रर ऑफ पिग्गी बैंक्स

बच्चों के लिये लिखे गये हरे पत्ते के रंग की पतरंगी और कहीं खो गया नाम का लड़का जैसी रचनाओं को भी पाठकों ने हाथों-हाथ लिया है.

दुनिया भर की भाषाओं में उनकी किताबों के अनुवाद हो चुके हैं.

कविता और उपन्यास लेखन के लिए रजा पुरस्कार, वीरसिंह देव पुरस्कार, सृजनभारती सम्मान, रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार, दयावती मोदी कवि शिखर सम्मान, भवानीप्रसाद मिश्र पुरस्कार, मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, पं. सुन्दरलाल शर्मा पुरस्कार जैसे कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके विनोद कुमार शुक्ल को उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ के लिए 1999 में ‘साहित्य अकादमी’ पुरस्कार भी मिल चुका है.

2020 में उन्हें मातृभूमि बुक ऑफ द ईयर अवार्ड भी दिया गया था.

इसके अलावा 2023 में अंतर्राष्ट्रीय साहित्य में उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें पेन नाबोकोव पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है. दक्षिण एशिया में यह सम्मान पहली बार किसी लेखक को दिया गया था.

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