वी द पीपल शब्द नहीं प्रतिज्ञा है-मोदी

नई दिल्ली | डेस्क: शनिवार को संविधान दिवस के मौक़े पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संविधान की प्रस्तावना की शुरुआत में जो ‘वी द पीपल’ लिखा है वह महज़ तीन शब्द नहीं हैं.

उन्होंने कहा, “आज ही के दिन स्वतंत्र भारत ने अपने लिए भविष्य की नींव डाली थी. मैं आधुनिक भारत का सपना देखने वाले बाबा साहेब आंबेडकर समेत संविधान सभा के सभी सदस्यों को, संविधान निर्माताओं को नमन करता हूं.”

“संविधान की प्रस्तावना की शुरुआत में जो ‘वी द पीपल’ लिखा है वह महज़ तीन शब्द नहीं हैं. ये एक अह्वान है, एक प्रतिज्ञा है और विश्वास है. संविधान में लिखी ये भावना, उस भारत की मूल भावना है जो दुनिया में लोकतंत्र की जननी रहा है.”

“चाहे व्यक्ति हो या संस्थाएं, हमारे दायित्व ही आज हमारी प्राथमिकता हैं. अपने कर्तव्य पथ पर चलते हुए ही हम देश को नई ऊंचाई पर ले जा सकते हैं. हमारे संविधान निर्माताओं ने एक ऐसा संविधान दिया है जो खुला और भविष्यवादी है और अपने आधुनिक विज़न के लिए जाना जाता है. इसलिए स्वभाविक तौर पर हमारे संविधान की आत्मा युवा केंद्रित है.”

इस मौक़े पर मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ये ज़रूरी है कि न्यायपालिका लोगों तक पहुंचे ना कि लोग न्यायपालिका तक पहुंचे.

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “हर किसी के लिए न्याय तक पहुंच आसान और सुगम हो ये तय करना हमारी ज़िम्मेदारी है.”

उन्होंने कहा, “हमारे जैसे विविध देश में न्यायपालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि हम न्याय की पहुंच लोगों तक आसान करें. न्यायपालिका ने कई ऐसे क़दम उठाए हैं जिससे लोगों के लिए न्याय पाने की राह आसान हो.”

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