छत्तीसगढ़ के चिरायु में घोटाला, जांच शुरु

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम चिरायु योजना में भारी गड़बड़ी के आरोप लगे हैं. बिहार के चारा घोटाले की तरह यहां बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर से किराये पर वाहन लेना दिखाया गया है. बच्चों की इस योजना में गड़बड़ी को लेकर पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम के आवेदन पर लोक आयोग में शिकायत दर्ज की गई है. आयोग ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है.

इधर मामले में कथित मुख्य आरोपी रायपुर जिले के पूर्व प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा है कि चिरायु योजना में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है और पूरी पारदर्शिता बरती गई है. उनका कहना है कि मामले की जांच की जायेगी तो सारे काम सही पाये जायेंगे.


आरोप है कि रायपुर जिले में वर्ष 2014 से 2017 के दौरान चिरायु कार्यक्रम के तहत गठित टीमों के लिए किराए पर वाहन लिए गए थे, जिसके लिये मनमाना तरीका अपनाया गया और सारे नियम-कायदे ताक पर रख दिये गये. इस शिकायत में जिले के तत्कालीन प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पर गंभीर लगाए गए हैं. इसके अनुसार प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने अपने चहेतों को लाभ पहुंचाया. निविदा में ऐसे लोग शामिल किए गए, जो पात्र नहीं थे. जिले के 4 विकासखंडों में वाहनों का अनुबंध कर लाखों का भुगतान भी हुआ.

आरोप के अनुसार वर्ष चिरायु योजना में 2014 -15 में राज्य के बाहर के वाहनों को नियमों के विपरीत कार्यादेश देकर तीन माह तक 88 हजार रुपए का भुगतान किया गया. 30 हजार रुपए प्रति वाहन की निर्धारित सीमा से परे जाकर हजारों रुपयों का भुगतान किया गया. शिकायत के अनुसार जिन लोगों से किराए पर वाहन के लिए अनुबंध किया गया, वे बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर हैं. जबकि किराए पर वाहन ट्रेवल्स एजेंसी से लेने का प्रावधान है. इसी तरह लक्ष्मीपुत्र ट्रेडर्स नामक फर्म का भुगतान किसी और को किया गया, जिसका प्रोपराइटर कोई और व्यक्ति है.

आरोप है कि अनुबंध वाहन के चालक की कलेक्टर दर पर नियुक्ति कर 3 माह तक भुगतान भी किया गया. वर्ष 2016-17 में गुरूदेव ट्रेवल्स ने जिस गाड़ी के कागजात जमा कर निविदा हासिल की, वह गाड़ी किसी और के नाम पर थी. इतना ही नहीं, नियमों के विपरीत 5 साल के लिए गाड़ी का अनुबंध किया गया. लेकिन कार्यक्रम के लिए 5 गाड़ियां किसी और से किराए पर ली गईं. डॉ. टेकाम का आरोप है कि इसमें एक करोड़ रुपए की गड़बड़ी हुई है. चिरायु योजना में धरसींवा और अभनपुर विकासखंड के लिए जिन गाड़ियों का अनुबंध किया गया, उसका यहां परिवहन विभाग में पंजीयन और परमिट तक नहीं है. शिकायत में कहा गया है कि तिल्दा विकासखंड में वाहन मालिक को भुगतान अभी भी किया जा रहा है, जबकि छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.

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