छापे के बाद फलों की बिक्री गिरी

रायपुर | संवाददाता: रायपुर में छापे के बाद फलों की बिक्री गिर गई है. छत्तीसगढ़ के रायपुर में जिला प्रशासन द्वारा हानिकारक केमिल्स से फलों को पकाने की सूचना पर मारे गये छापों के बाद उसकी बिक्री गिर गई है. पहले रायपुर के लालपुर स्थित फलों की मंडी में रोज 60 टन माल आता था जो जब गिरकर 10 टन पर सिमट गया है. लोग फल लेने से कतराने लगे हैं ऐसे में फल दुकानदारों को रोज लाखों का नुकसान हो रहा है. लालपुर के फल विक्रेताओं का दावा है कि लालों से केले को टैगफोन 39 से पकाया जाता रहा है. फलों को पकाने के बाद उसे 72 घंटे तक कोल्ड स्टोरेज में रखा जाता है जिससे केमिकल का असर खत्म हो जाता है. उनका यह भी दावा है कि केमिकल का असर केले के छिलके तक ही रहता है परन्तु लोगबाग अब भी फल खरीदने से कतरा रहें हैं.

रायपुर के लालपुर स्थित थोक फल विक्रताओं के संघ के अध्यक्ष विजय चौधरी का कहना है कि फलों में रसायन को लेकर हुये विवाद के बाद उसकी बिक्री गिर गई है. फल विक्रेताओं को 70 फीसदी तक नुकसान उठाना पड़ रहा है. इस वजह से धीरे-दीरे फल मंगाना कम कर दिया गया है.


उधर, जानकारों का मानना है कि फलों को केमिकल से पकाये जाने के कारण लीवर तथा किडनी की बीमारी बढ़ रही है.

गौरतलब है कि 18 जनवरी को राजधानी रायपुर में नगर निगम, राजस्व विभाग तथा खाद्य एवं औषधि विभाग ने संयुक्त छापेमारी की. छापे के दौरान सरकारी अधिकारी जब विभिन्न फलों के बाजार पहुंचे तो पाया कि धड़ल्ले से हानिकारक रसायनों का उपयोग कच्चे फलों को पकाने के लिये किया जा रहा है.

आशीष फ्रूट भंडार में पाया गया था कि वहां टैगपोन-36 नामक रसायन को पानी में मिलाकर उससे केला को पकाया जा रहा है. संयुक्त टीम ने वहां से 23 क्विंटल कच्चे केले को जब्त किया गया.

इसी तरह वेंकटलक्ष्मी फ्रूट से ईथीलीन गैस सिलेंडर जब्त किया गया था. इस सिलेंडर से मिथनीक गैस का चेंबर बना 8 टन केला पकाया जाता था. प्रशासन ने इसे जब्त कर लिया था.

जवाहर बाजार के आरकेजी फ्रूट से 25 क्विंटल पपीता तथा चौबे महाराज फ्रूट सप्लायर के यहां से 30 क्विंटल पपीता तथा 80 किलो आम जब्त किया गया था.

शरीर को पहुंचाते हैं हानि-

कैल्शियम कार्बाइट: डब्ल्यूएचओ ने इससे फलों को पकाना पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है. यह एक तरह का यौगिक है, जो फलों में लगे रहने के बाद शरीर में जाने से बीमारियां पैदा करता है. खासकर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.

टैगपोन-39 :यह आक्सीडाइड एजेंट है. इस केमिकल के शरीर में जाने से खासकर अधिक मात्रा में पहुंचने से पेट, लीवर, प्लाज्मा से संबंधित बीमारियां होती हैं.

इथलीन गैस : इस गैस का उपयोग फलों को पकाने में किया जा रहा है. ज्यादा मात्रा से शरीर के लिए हानिकारक है. स्किन, लीवर और किडनी से संबंधित बीमारियां होने का खतरा रहता है.

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