सरकारी अस्पताल में ‘पद्मश्री’ का अपमान

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ की राजधानी के सरकारी अस्पताल में ‘पद्मश्री’ का अपमान होता है. राष्ट्रपति द्वारा ‘पद्मश्री’ से नवाजे गये व्यक्ति की चिकित्सा में जब कोताही बरती जाती है तो इसका सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है कि वहां आम आदमी के साथ कैसा व्यवहार किया जाता होगा. शनिवार को रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में ‘पद्मश्री’ पूनाराम निषाद के निधन के बाद उसके परिजनों ने दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है.

‘पद्मश्री’ पूनाराम निषाद के बेटे रोहित निषाद का आरोप है कि उनके पिता को 8 फऱवरी की रात 9 बजे रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराने लाया गया था. रात भर उन्हें ट्रामा सेंटर के बाहर स्ट्रेचर पर बिना चादर और तकिये के पड़ा रहने दिया गया. जिससे उनकी तबियत और बिगड़ गई. 9 फरवरी को उन्हें सबेरे भर्ती किया गया लेकिन उपचार के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई.


यहां तक कि शनिवार 11 फरवरी को जब पूनाराम निषाद की मौत हुई तो उन्हें घर वाले ही शव वाहन तक लेकर आये.

पूनाराम निषाद के बेटे का आरोप है कि जब उन्होंने जूनियर डॉक्टर से अपने पिता के पेट में दर्द की शिकायत की तो उनसे कह दिया गया कि ऑपरेशन करना पड़ेगा. साथ ही जांच के समय डॉक्टर ने गार्ड से कहकर बेटे को बाहर निकाल दिया जबकि मरीज के साथ एक अटेंडेंट को 24 घंटे रहने की इजाजत है.

अंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विवेक चौधरी से पूछने पर उन्होंने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है. मैं पता लगवाता हूं. अगर ऐसा हुआ है तो कड़ी कार्यवाही होगी.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ का नाम देश-विदेश में रौशन करने वाले पंडवानी गायक ‘पद्मश्री’ पूनाराम निषाद को साल 2014 में टीबी के इलाज के लिये भर्ती कराया गया था. ऐसे मरीज को अस्पताल लाने के साथ ही उसके शरीर में ऑक्सीजन की जांच, ईसीजी, एक्सरे, खून में सोडियम-पोटेशियम का मात्रा तथा ‘टी’ टेस्ट जैसे जांच तुरंत करवाना चाहिये परन्तु 8 फरवरी की रातभर उन्हें ट्रामा सेंटर के बाहर पड़ा रहने दिया गया. किसी ने उनकी ओर झांका तक नहीं.

सवाल किया जाना चाहिये कि राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में के ट्रामा सेंटर में यदि आपातकालीन मरीजों का इलाज नहीं होता है तो वे कहां जाये.

यदि राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल का यह हाल है तो राज्य में आम मरीजों के साथ सरकारी अस्पतालों में कैसा व्यवहार किया जाता होगा इसे आसानी से समझा जा सकता है.

गौरतलब है कि पूनाराम निषाद की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी. इस कारण से सरकारी अस्पताल में इलाज करवाना उनकी मजबूरी थी.

देश के नागरिक सम्मान से नवाजे गये व्यक्ति के साथ जब लापरवाहीपूर्वक व्यवहार किया जाता है तो आम आदमी को इन सरकारी अस्पताल में किन हालात से होकर गुजरता है उसकी कल्पना आसानी से की जा सकती है.

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