बस्तर में लोकतंत्र नहीं है- Cong

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने कहा बस्तर में पुलिसतंत्र है. छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बस्तर में लोकतंत्र नहीं आईजी कल्लूरी का राज चलता है. बस्तर में वही होता है जो आईजी कल्लूरी चाहते हैं. कांग्रेस ने दरभा ब्लॉक में सामनाथ की हत्या के मामले में प्रोफेसरों, राजनीतिक दल से जुड़े लोगों पर एफआईआर दर्ज करने पर कहा है कि बस्तर में लोकतंत्र खत्म हो गया है. जिस तरीके से आईजी कल्लूरी काम कर रहे हैं, राजनीतिक दलों के लोगों को हत्या के मामले में फंसा रहे हैं, उससे तो यह सवाल उठने लगा है कि कहीं झीरम घाटी मामले के सूत्रधार कल्लूरी ही तो नहीं थे.

छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के मीडिया सेल के चेयरमैन ज्ञानेश शर्मा ने कहा कि नंदिनी सुन्दर दिल्ली विश्वविद्यालय की तथा अर्चना प्रसाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली की प्रोफेसर हैं. संजय पराते छत्तीसगढ़ माकपा के राज्य सचिव हैं. विनीत तिवारी भी दिल्ली के ही रहने वाले हैं और लेखक हैं. मंजू कवासी गुफड़ी के सरपंच तथा मंगल राम स्थानीय ग्रामीण हैं. हत्या नक्सली करें और आरोपी इन लोगों को बनाया जाये, यह बात ही आश्चर्य पैदा करने वाली है.


इससे साफ यह संदेश दिया जा रहा है कि बस्तर में कोई न आये, अगर आयेगा तो उसे भी ऐसे ही मामलों में फंसा दिया जायेगा. इस पर हैरत की बात यह है कि राज्य सरकार के एक भी नुमाइंदे ने कल्लूरी के इस कदम पर न तो कोई प्रतिक्रिया दी है न ही कुछ कहा है.

उन्होंने कहा कि ताड़मेटला कांड की जांच सीबीआई कर रही है. केंद्र में भाजपा की सरकार है, राज्य में भाजपा की सरकार है. अगर राज्य सरकार को लगता है कि सीबीआई गलत है तो वह केंद्र सरकार से क्यों नहीं बात करती. कायदे से तो अब सामनाथ की हत्या का मामला भी सीबीआई के हवाले कर देना चाहिये, ताकि मालूम तो चले कि यह प्रोफेसर, राजनीतिक दलों के लोग और ग्रामीण कैसे हत्या के आरोपी हुये.

पीसीसी मीडिया चेयरमैन ने कहा कि बस्तर पुलिस के कारण शासन को हाल ही में हाईकोर्ट में मुंह की खानी पड़ी है, जब एक छात्र और एक नाबालिग को मुठभेड़ में मार दिया गया था और अदालत में शासन को यह कहना पड़ा कि अज्ञात लोगों ने हत्या की.

इसी मामले में बस्तर पुलिस ने शहीद कर्मा के परिजनों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया था, यह भी कल्लूरी के निर्देश पर हुआ था.

ताजा मामले में भी बस्तर पुलिस असल आरोपियों को पकड़ने की बजाय राजनीतिक दलों के लोगों, लेखकों और निर्दोष ग्रामीणों पर मामला दर्ज कर रही है. फर्जी मुठभेड़ कर आदिवासियों का खात्मा किया जा रहा है.

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