बिहार: BJP द्वारा जमीन खरीदी पर रार

पटना | संवाददाता: बिहार में एक समाचार चैनल ने शुक्रवार को खबर दिखाई कि भाजपा ने 22 जिलों में अपने ऑफिस के लिये जमीनें खरीदी हैं. उसके बाद से राज्य की राजनीति गर्मा गई है. जनता दल युनाइटेड ने इस पर भाजपा से सफाई मांगी है. यह मामला ऐसे समय में आया है जब देशभर में नोटबंदी के लोकर बवाल मचा हुआ है. बिहार जनता दल युनाइटेड ने सवाल दागा है कि भाजपा बताये कि जो जमीनें खरीदी गई हैं उनका भुगतान चेक से हुआ है या कैश से.

जदयू ने बकायदा संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर भाजपा पर आरोप लगाये हैं. आरोप लगाया गया है कि भाजपा ने कार्यालय के नाम पर निवेश किया है. जदयू प्रवक्ता संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि जिस तरह से जमीन खरीदी गयी, इससे यह बात सच हो गयी कि भाजपा के बड़े नेताओं से लेकर छोटे कार्यकर्ताओं तक को नोटबंदी की खबर थी.


जदयू के दूसरे प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि भाजपा का देश में हजार से अधिक संगठनात्मक जिले है. सभी जगह कार्यालय बनाना है. सरकार पहले भी जमीन खरीदने का फैसला ले सकती थी, लेकिन नोटबंदी से पहले लेना यह शक पैदा करता है.

उन्होंने कहा कि इसकी जेपीसी से जांच हो तथा भाजपा 20 हजार से ज्यादा दान देनेवालों के नाम वह सार्वजनिक करे.

जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि भाजपा हर जिला इकाई को जमीन व भवन के लिए एक-एक करोड़ दे रही है. प्रदेश कार्यालय के लिए 15 करोड़ दिये गये हैं. भाजपा की सालाना आय 970. 43 करोड़ हैं. जमीन खरीदने व कार्यालय बनाने में 1914 करोड़ खर्च होंगे. इतनी राशि कहां से आयेगी. भाजपा आर्थिक फर्जीवाड़ा कर रही है.

उधर, भाजपा नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने साफ कहा है कि पार्टी जदयू को क्यों हिसाब दे. कार्यालय के लिए जमीन की खरीद में कोई गड़बड़ी नहीं है. नोटबंदी से इसका कोई लेना-देना नहीं है. पटना में अपनी जमीन पर पार्टी का कार्यालय तक नहीं है, जबकि कांग्रेस और अन्य दलों का कार्यालय अपनी जमीन पर है.

उन्होंने कहा कि जमीन खरीदने का निर्णय पार्टी ने दो माह पूर्व लिया था. इसका नोटबंदी से कोई लेना देना नहीं है.

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