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छत्तीसगढ़: कोंडागांव में नया जेल बनेगा

जगदलपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में कड़ी सुरक्षा वाली जिला जेल बनने की राह आसान हो गई है. जिला प्रशासन ने नारायणपुर रोड पर फॉरेस्ट नर्सरी के पास जेल प्रशासन को 10 हेक्टेयर जमीन आवंटित कर दी है. बताया गया है कि इस भूखंड के लिए तीन करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया है. जमीन संबंधी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. अब निर्माण के लिए बजट जारी होने का इंतजार किया जा रहा है.

आवंटित 10 हेक्टेयर जमीन में से पांच हेक्टेयर पर बैरकें, प्रशासनिक भवन, किचन और जेल के बाहरी हिस्सों में सुरक्षा बलों के लिए अलग से आवासीय बैरकें बनेंगी. इस तरह बाकी पांच हेक्टेयर अधिकारियों और कर्मचारियों के आवास तैयार होंगे.

एक अधिकारी ने बताया कि जिला जेल में 600 बंदियों तथा कैदियों को रखने की क्षमता के हिसाब से बैरकें बनाई जाएंगी. अहम बात यह है कि इलाके की परिस्थतियों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के मानकों का हर तरह से ध्यान रखा जाएगा. क्लोज सर्किट कैमरों से लेकर स्कैनर, ई-प्रिजनर सिस्टम की पूरी व्यवस्था रहेगी.

दरअसल, इस क्षेत्र में नई जेल बनाने की कवायद चार साल पहले ही शुरू हो गई थी. इस बीच कोंडागांव अलग से नया जिला बन गया. हालांकि डेढ़ साल पहले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 30 पर जेल बनाना तय हुआ था, लेकिन वहां जमीन संबंधी विवाद के बाद इसका लोकेशन नारायणपुर रोड पर शिफ्ट कर दिया गया है.

सेंट्रल जेल के अधीक्षक राजेंद्र कुमार गायवाड़ ने बताया कि कोंडागांव में उच्च सुरक्षा जेल तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. अगले दो माह के अंदर वहां निर्माण शुरू हो जाएगा. नए जिले में एक बड़ी सुविधा वहां तैयार होगी. सेंट्रल जेल में नई जेल बनने से बंदियों का दबाव कम होगा.

बस्तर की सेंट्रल जेल में इस समय लाकअप 1600 के आसपास है. वहां क्षमता से ढ़ाई गुना ज्यादा बंदियों तथा कैदियों को रखा गया है. इसके अलावा यहां नक्सली मामलों के विचाराधीनों की संख्या भी काफी है. बीजापुर में जेल बन चुकी है, लेकिन शुरू नहीं हो पा रही है. सुकमा व नारायणपुर में सुरक्षा कारणों से जेलों को बंद किया गया था, जो अभी तक चालू नहीं हो सकी है. इस कारण सेंट्रल जेल पर दबाव है.

कोंडागांव में जेल बनने से यहां बंदियों का दबाव कम होगा. इतना ही नहीं, केशकाल, नारायणपुर और कोंडागांव के बंदियों को सेंट्रल जेल लाने की जरूरत नहीं रह जाएगी.

माना जा रहा है कि आने वाले समय में कांकेर, दंतेवाड़ा और जगदलपुर की तीनों जेलों में दबाव कम हो जाएगा. इसके पीछे वजह यह है कि कोंडागांव में 600 बंदियों की क्षमता के अलावा पंखाजूर में 400 और भानुप्रतापपुर में 400 बंदियों की क्षमता वाली जेलों के लिए जमीन फाइनल हो गई है. इतना ही नहीं, सुकमा, बीजापुर व नारायणपुर जिला प्रशासन को वहां की जेल खाली करवाकर जेल प्रशासन को सौंपने के लिए पत्र लिखा गया है.

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