आने का वादा कर चले गये विप्लव त्रिपाठी

आलोक प्रकाश पुतुल | बीबीसी : “बुलु कहता था कि फ़ौज़ में हैं तो कुर्बानी के लिए तो हमेशा तैयार रहना होता है. लेकिन जिस तरह से उसकी शहादत हुई, उससे हम सब सदमे में हैं. उसने जल्दी ही आने का वादा किया था लेकिन अब वो कभी नहीं आएगा.”

ये सब बताते हुए बुलु यानी विप्लव त्रिपाठी के मित्र अभिषेक की आवाज़ भर्रा जाती है.


मणिपुर में शनिवार को हुए चरमपंथियों के हमले में असम राइफल्स के पांच जवानों की मौत हो गई. मारे जाने वालों में छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के रहने वाले कर्नल विप्लव त्रिपाठी भी थे, जिनकी पत्नी अनुजा और साढ़े छह साल का बेटा अबीर भी इस हमले में मारे गए.

विप्लव त्रिपाठी के पारिवारिक मित्र निशांत सारस्वत बताते हैं कि रायगढ़ शहर में फ़ौज़ में जाने वाले लोगों की संख्या गिनी-चुनी थी. उस समय विप्लव ने सैनिक स्कूल में प्रवेश के लिए ज़िद की और फिर वे उसी रास्ते पर आगे बढ़ते चले गए.

निशांत कहते हैं, “विप्लव भैया का छोटा भाई अनय मेरा दोस्त है. हम सब ने साथ में पढ़ाई की है. बड़े भैया की देखा-देखी उसने भी सैनिक स्कूल में एडमिशन के लिए कहा और उसने भी सेना ज्वॉइन की. अनय असम राइफल्स में लेफ्टिनेंट कर्नल हैं. अभी अनय का भी प्रमोशन हुआ है और ढाई महीने के प्रशिक्षण पर जाने से पहले वह रायगढ़ आया था. रविवार की शाम उसे प्रशिक्षण के लिए जाना था. लेकिन अब वह रायपुर में विप्लव भैया और परिवार के लोगों के शव की प्रतीक्षा कर रहा है.”

रायगढ़ के घर में आने-जाने वाले लोगों का क्रम बना हुआ है. शहर के अधिकांश प्रतिष्ठान शोक और सम्मान में बंद हैं.

सेना के स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि अगर मौसम ठीक रहा तो रविवार की देर शाम तक शव रायपुर पहुंचेंगे.

सोमवार की सुबह शवों को अंतिम संस्कार के लिए रायगढ़ रवाना किया जाएगा.

दादा थे संविधान सभा के सदस्य

विप्लव के दादा किशोरी मोहन त्रिपाठी एक शिक्षक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे. आज़ादी के बाद वे संविधान सभा के भी सदस्य बनाए गए थे. इसके अलावा वे 1950 में अस्थाई संसद के सदस्य मनोनीत किए गए थे. साल 1962 में अविभाजित मध्य प्रदेश के धर्मजयगढ़ विधानसभा क्षेत्र में हुए पहले चुनाव में वे विधायक बने.

विप्लव के पिता सुभाष त्रिपाठी रायगढ़ से प्रकाशित ‘बयार’ नामक अख़बार के संपादक हैं, जबकि उनकी मां आशा त्रिपाठी लाइब्रेरियन के पद से सेवानिवृत्त हुई हैं.

शनिवार को हुए चरमपंथियों के हमले को लेकर विप्लव के मामा राजेश पटनायक बताते हैं कि एक दिन पहले ही विप्लव का छोटा भाई अनय, शिलॉन्ग से सड़क मार्ग से रायगढ़ पहुंचा था.

राजेश पटनायक कहते हैं, “सुबह मैंने और अनय ने साथ नाश्ता किया और घर के लिए निकले ही थे कि उतने में आर्मी के किसी लिंक से, अनय के पास मैसेज आया. अनय ने तुरंत विप्लव की यूनिट में फोन लगाया और पूछा कि क्या स्थिति है? बताया गया कि सात लोग मारे गए हैं.”

सैनिक स्कूल में पढ़ाई

परिवार के सदस्य बताते हैं कि 30 मई 1980 को पैदा हुए विप्लव की आरंभिक पढ़ाई शहर के कार्मेल स्कूल में हुई, इसके बाद वे सैनिक स्कूल रीवा में पढ़ने चले गये.

बाद की पढ़ाई उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी में पूरी की. 2001 में उन्होंने कुमाऊं रेजिमेंट में बतौर लेफ्टिनेंट नौकरी की शुरुआत की.

दोस्त और परिजन बताते हैं कि लगातार सैनिक स्कूल और रक्षा अकादमी में पढ़ाई के बाद भी किसी को भरोसा नहीं था कि विप्लव फ़ौज़ की नौकरी करेंगे.

उनके पारिवारिक मित्र निशांत सारस्वत कहते हैं, “वे इतने शांत स्वभाव के थे कि लगता ही नहीं था कि वे सेना की नौकरी करेंगे. वे स्वभाव से बेहद विनम्र थे.”

विप्लव लगातार अलग-अलग जगहों पर तैनात रहे.

सुभाष त्रिपाठी और उनके पोते अबीर
सुभाष त्रिपाठी और उनके पोते अबीर

इसी दौरान 2010 में विप्लव का विवाह बिलासपुर की रहने वाली अनुजा से हुआ था. अगले सप्ताह ही उनकी शादी की सालगिरह थी.

विप्लव के परिजनों का कहना है कि परिवार और रिश्तों को वे हमेशा से महत्व देते थे लेकिन देश सेवा उनकी पहली प्राथमिकता थी. कम छुट्टियों के कारण उनका रायगढ़ आना नहीं हो पाता था.

इस साल दीवाली पर जब उन्हें छुट्टी नहीं मिली तो उन्होंने अपने माता-पिता को मिजोरम आने के लिए कहा. पूरा परिवार दीवाली पर साथ था. माता-पिता कई दिनों तक बेटे, बहू और पोते के साथ रहकर पिछले सप्ताह ही रायगढ़ लौटे थे.

विप्लव के एक दोस्त कहते हैं, “बयार अख़बार के 50 साल पूरे हुए थे तो विप्लव और अनय, दोनों भाई रायगढ़ पहुंचे थे. 30 अक्टूबर 2019 को एक बड़ा आयोजन हुआ. तब दोनों भाइयों ने कार्यक्रम की एंकरिंग की थी. विप्लव ने कहा था कि वह जल्दी ही रायगढ़ आएगा.”

दोस्तों और परिजनों ने कल्पना भी नहीं की थी कि विप्लव त्रिपाठी की वापसी इस तरह होगी.

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