कांग्रेस शासनकाल में UAPA में सर्वाधिक गिरफ़्तार

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में 2015 से 2019 तक UAPA के तहत सर्वाधिक लोग कांग्रेस शासनकाल में गिरफ़्तार किए गये हैं.अकेले 2019 में छत्तीसगढ़ में 32 लोगों को UAPA के तहत गिरफ़्तार किया गया था.

इसी साल 9 मार्च को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में जो तथ्य सामने आए हैं, उसके अनुसार 2015 से 2018 तक कुल 15 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. लेकिन 2019 में यह आंकड़ा दुगने से अधिक हो गया.


देश भर में त्रिपुरा में वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ UAPA यानी गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किए जाने को लेकर बहस चल रही है.

वहां फैले सांप्रदायिक दंगों की फैक्ट फाइंडिग टीम में शामिल वकीलों के ख़िलाफ़ तो मामला दर्ज किया ही गया, ट्वीटर पर लिखे जाने भर को आपत्तिजनक मानते हुए त्रिपुरा पुलिस ने UAPA के तहत मामला दर्ज कर लिया गया.

इसके तहत 101 सोशल मीडिया अकाउंट पोस्ट पर कड़ी कार्रवाई की है, इसमें 68 ट्विटर, 31 फ़ेसबुक और दो यूट्‌यूब अकाउंट शामिल हैं.

छत्तीसगढ़ का हाल

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 2015 में राज्य में गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के अंतर्गत 2 मामले दर्ज़ किए गये थे. इसमें 3 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था.

इसी तरह 2016 में 3 और 2017 में 1 मामला दर्ज किया गया. इसमें क्रमश: 5 और 3 लोगों को गिरफ़्तार किया गया.

2018 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी सत्ता में आई.

इस साल UAPA के अंतर्गत 10 मामले दर्ज किए गये. हालांकि मार्च 2021 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इसमें 4 लोगों की ही गिरफ़्तारी हो पाई थी.

2019 में इस क़ानून के अंतर्गत लोगों की गिरफ़्तारी के सारे आंकड़े टूट गये.

इस साल भले दर्ज मामलों की संख्या 2 थी लेकिन गिरफ़्तार लोगों की संख्या 32 पहुंच गई थी.

बॉम्बे हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील मिहिर देसाई के अनुसार-“यूएपीए लोगों को दोषी ठहराने के लिए नहीं है, इसका इस्तेमाल उन्हें पकड़ कर रखने के लिए किया जाता है. वे निर्दोष हो सकते हैं लेकिन काफी समय बीत जाता है और व्यक्ति का जीवन बर्बाद हो जाता है. सामान्य मामलों में सबूत का बोझ पुलिस पर पड़ता है लेकिन यूएपीए के तहत, बोझ उस व्यक्ति पर है जिस पर आरोप है और वह खुद को बेगुनाह साबित करे.”

टाडा, पोटा और यूएपीए

इंडिया स्पेंड की एक रिपोर्ट के अनुसार ‘यूएपीए’ केंद्र सरकार को पूर्ण शक्ति प्रदान करता है. अध्याय 2 की धारा 3 के उपधारा 1 के तहत यदि केंद्र सरकार का मानना ​​है कि एक गतिविधि गैरकानूनी है तो वह आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इसे घोषित कर सकती है.

अधिनियम के मुताबिक जो ‘भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता’ पर ‘बाधा डालने का इरादा’ रखती है वह गैरकानूनी गतिविधि है. यह उन सभी हालातों का प्रतिवाद करता है, जो भारत के किसी भी हिस्से में भारत के खिलाफ ‘असंतोष’ का कारण बन सकता है. इन परिभाषाओं ने दो कानूनों के लिए जमीन भी बनाई, टाडा-1985 और पोटा-2002.

1995 में टाडा को समाप्त होने की इजाजत दी गई थी और 2004 में पोटा को रद्द कर दिया गया था.

मूल रूप से 1967 में पारित यूएपीए में 2004, 2008 और 2012 में संशोधन हुए हैं. 2004 तक, ‘गैरकानूनी’ गतिविधियां अलगाव और क्षेत्र के समझौते से संबंधित कार्यों को संदर्भित करती हैं. 2004 के संशोधन के बाद, अपराधों की सूची में ‘आतंकवादी अधिनियम’ जोड़ा गया था.

2016 में, यूएपीए मामलों को भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज अपराधों के अतिरिक्त ‘राज्य के खिलाफ अपराध’ के तहत वर्गीकृत किया गया था.

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