MSP पर मक्के की ख़रीदी नहीं, औने-पौने में बेच रहे आदिवासी

रायपुर | संवाददाता: सरकार समर्थन मूल्य पर 52 तरह की फसलों की ख़रीदी का दावा ज़रुर कर रही है. लेकिन सूरजपुर ज़िले के मक्का उगाने वाले किसान अपनी फसल बेचने के लिए भटक रहे हैं.

सरकार ने इस साल मक्का के लिए 1850 रुपये का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP घोषित किया है. लेकिन MSP पर ख़रीदी नहीं होने से किसान 1400 रुपये में मक्का बेचने को बाध्य हो रहे हैं.


शंकरपुर, बरपारा, खुटिया, लैंगा, खम्हरिया, कालीपुर जैसे गांवों में बड़ी संख्या में किसानों ने हर साल की तरह इस साल भी मक्के की फसल लगाई थी.

इस साल मौसम के कारण पहले ही मक्के की उपज प्रभावित हुई थी. लेकिन किसानों को उम्मीद थी कि शायद इस साल समर्थन मूल्य पर मक्के की ख़रीदी हो जाएगी.

सूरजपुर में मक्के की क़ीमत पता करने पहुंचे रामकिशुन यादव ने कहा-“हमें भूपेश बघेल की सरकार से बहुत उम्मीद थी कि यह किसानों की सुनेगी. लेकिन हमारी उम्मीद धरी रह गई. कहीं पर भी समर्थन मूल्य पर मक्का नहीं ख़रीदा जा रहा है.”

हालांकि पिछले साल जब मक्के का समर्थन मूल्य 1760 रुपये तय किया गया था, तब भी किसानों को उम्मीद थी कि सरकार फसल की ख़रीदी करेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

स्थानीय सोसायटी के पदाधिकारियों ने किसानों को भरोसा दिया था कि अगले साल मक्के की ख़रीदी की जाएगी. लेकिन इस साल अधिकारी हवाला दे रहे हैं कि अभी तक राज्य सरकार की ओर से मक्के की ख़रीदी का कोई निर्देश नहीं मिला है. ऐसे में समर्थन मूल्य पर मक्के की ख़रीदी संभव नहीं है.

राज्य सरकार की कृषि विमणन मंडी बोर्ड के इस साल के शुरुआती 6 दिनों के आंकड़े मक्का ख़रीदी की कहानी खुद ही कह रहे हैं.

आदिवासी इलाकों की सरकारी मंडी में औने-पौने भाव पर बिका मक्का

राज्य सरकार की मंडी की बात करें तो गरियाबंद की सरकारी मंडी में 5 जनवरी को 305 क्विंटल मक्का की ख़रीदी हुई, जिसकी क़ीमत 1500 रुपये थी.

नारायणपुर की मंडी में 104 क्विंटल मक्का, तीन क़ीमतों पर बिका. यहां 1300, 1350 और 1400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मक्का ख़रीदा गया.

समर्थन मूल्य पर ख़रीदी की व्यवस्था की विफलता ने आदिवासियों को मंडी में औने-पौने भाव में मक्का बेचने के लिए बाध्य कर दिया.

अब जैसे जगदलपुर मंडी की बात करें तो अकेले 3 जनवरी को जगदलपुर की सरकारी मंडी में किसानों ने 36,499 क्विंटल मक्का बेचा. इनमें से किसी भी किसान को समर्थन मूल्य के आसपास की भी क़ीमत नहीं मिली.

कोंडागांव के किसानों ने पिछले छह दिनों में सरकारी मंडी में 43,168 क्विंटल मक्का बेचा. जाहिर है, किसी भी किसान को समर्थन मूल्य के बराबर की क़ीमत नहीं मिली.

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