NDTV पर बैन स्थगित, SC में कल सुनवाई

नई दिल्ली | संवाददाता: केन्द्र सरकार ने NDTV पर 1 दिन के बैन को स्थगित कर दिया है. केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री वैंकया नायडू ने ये फ़ैसला, एनडीटीवी के प्रमोटर डॉ. प्रणॉय राय से मुलाक़ात के बाद लिया है. उधर, सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा लगाये गये बैन के खिलाफ सोमवार को NDTV की तरफ से अपील की गई है. जिस पर कल याने मंगलवार को सुनवाई होगी.

NDTV पर बैन
उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अपने 3 नवंबर के आदेश में NDTV को 9 नंवबर के दिन 24 घंटे बंद रखने को कहा था. यह आदेश NDTV द्वारा पठानकोट हमले के कवरेज के सिलसिले में दिया गया था.


पठानकोट हमलों के दौरान टीवी चैनलों की कवरेज़ को लेकर एक उच्च स्तरीय पैनल का गठन हुआ था. पैनल का कहना है NDTV इंडिया ने पठानकोट हमले की कवरेज़ के दौरान सामरिक रूप से संवेदनशील सूचनाएं प्रसारित की थीं.

इस कारण से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने केबल टीवी नेटवर्क (नियमन) अधिनियमन के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि “एनडीटीवी इंडिया को आदेश दिया जाता है कि वह 9 नवंबर, 2016 के दिन की शुरूआत (आठ नवंबर की देर रात 12:01 मिनट) से लेकर 10 नवंबर, 2016 के दिन के खत्म होने (नौ नवंबर की देर रात 12:01 बजे) तक के लिए प्रसारण अथवा पुनर्प्रसारण पूरे भारत में हर प्लेटफॉर्म पर बंद रखेगा.”

विरोध के स्वर
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के इस निर्णय का देशभर के पत्रकारों, संपादकों तथा बुद्धिजीवियों ने विरोध किया. केन्द्र सरकार के इस कदम की तुलना आपातकाल से की जाने लगी. सोशल मीडिया पर भी #RavishKumar, #WeSupportNDTV,#बागों_में_बहार_है जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे.

शुक्रवार रात को NDTV के प्राइम टाइम में एंकर रवीश कुमार ने दो मूक अभिनय कलाकारों के सहारे सवाल किया कि अगर हम सवाल नहीं पूछेंगे तो क्या करेंगे. इस कार्यक्रम के बाद देश के वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने फ़ेसबुक पर लिखा, “आज रवीश का प्राइम टाइम ऐतिहासिक था. उन्होंने सरकार की तंगदिली को बेनक़ाब किया.”

दूसरी तरफ एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के इस आदेश की आलोचना करते हुये इसे वापस लिये जाने की मांग की. कई शहरों में स्वतःस्फूर्त ढ़ंग से सरकार के निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन किये गये.

केन्द्र सरकार द्वारा एनडीटीवी को एक दिन के लिये बैन किये जाने की विपक्ष ने भी कड़ी आलोचना की.

भाजपा का पक्ष
सरकार के निर्णय पर भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बीबीसी के एक कार्यक्रम मे कहा था कि एनडीटीवी पर लगाया गया एक दिन का प्रतिबंध प्रतीतात्मक है.

उन्होंने बीबीसी के ‘इंडिया बोल’ कायर्क्रम में कहा था, “अभिव्यक्ति की संविधान प्रदत्त स्वतंत्रता और स्वेच्छाचारी स्वच्छंदता दोनों में अंतर समझना होगा.” उन्होंने कहा कि एनडीटीवी को पहली बार नोटिस नहीं मिला है.

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा था, “एनडीटीवी को हमारे कार्यकाल में नहीं यूपीए के कार्यकाल में 16 नवंबर 2010 को सेरेना विलियम्स की अश्लील फोटो दिखाने के मामले में नोटिस गया. जनवरी 2006 में एक विज्ञापन को आपत्तिजनक ढंग से दिखाने के सिलसिले में भी उसे नोटिस दिया गया.”

ऑफ एयर के बारे में उन्होंने बताया, “संबंधित एक्ट की एक धारा के तहत किसी चैनल को एक महीने तक ऑफ एयर करने का प्रावधान है. 24 घंटे तो एक तरह का प्रतीकात्मक है ताकि एक संदेश जाये. लोकतंत्र में सबको अधिकार है तो उसके साथ-साथ दायित्व भी हैं, चैनल को एक मर्यादा की सीमा में रहना चाहिये.”

सरकार का पक्ष
केन्द्र सरकार के मंत्री एम वेकैंया नायडू ने देशभर में हो रहे विरोध पर कहा था कि यह विरोध राजनीति से प्रेरित है. एम वेंकैंया नायडू ने ट्वीट करके कहा प्रेस की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है परन्तु देश की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता.

उन्होंने सवाल किया देश की सुरक्षा ज्यादा अहम है या टीवी चैनल की टीआरपी. उन्होंने कहा कि इस साल जनवरी में पठानकोट में सुरक्षा बल के आतंकवाद विरोधी अभियानों का लाइव कवरेज करने के दौरान नियमों का उल्लंघन करने पर एनडीटीवी के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर देरी से हो रही आलोचना स्पष्ट रूप से आधी अधूरी सूचना और राजनीति से प्रेरित है.

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