सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध माना

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को उलटते हुए दो व्यस्कों के बीच समलैंगिक संबंधों को अपराध माना है.

इससे पहले साल 2009 में दिल्ली हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 377 में समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था. धारा 377 के तहत दो व्यस्कों के बीच समलैंगिक रिश्ते को अपराध माना गया है और उसके लिए उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है.

इस फैसले के खिलाफ कई सामाजिक, धार्मिक संगठनों और कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका पर मार्च 2012 में सुनवाई हुई थी जिस दौरान फैसले को सुरक्षित रख लिया गया था और अब 21 महीने बाद यह फैसला आया है.

बुधवार को हुई सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति जी.एस.सिंघवी और न्यायमूर्ति एस.जे.मुखोपाध्याय की पीठ ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 को बदलने के लिए कोई संवैधानिक गुंजाइश नहीं है.

पीठ ने यह भी कहा है कि सरकार चाहे तो कानून में बदलाव भी कर सकती है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लेज़बियन, गे, बाइ-सेक्शुअल और ट्रांस जेंडर कम्युनिटी के लोगों के लिए यह बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है.

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