एड़समेटा कांड की हो जांच-सुप्रीम कोर्ट

रायपुर | संवाददाता: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के एड़समेटा कांड की जांच के निर्देश दिये हैं. एक याचिका पर सुनवाई करते हुये आज सुप्रीम कोर्ट ने आठ आदिवासियों की कथित मुठभेड़ में मारे जाने की घटना की राज्य की बाहर की एजेंसी से जांच कराने के निर्देश दिये हैं.

माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मामले की सीबीआई जांच हो सकती है.

विपक्ष में रहते हुये कांग्रेस पार्टी मामले की सीबीआई जांच की मांग करती रहा है.

गौरतलब है कि 17 मई 2013 को बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के एड़समेटा में पुलिस और नक्सलियों के बीच कथित मुठभेड़ में नौ लोग मारे गए थे. इसमें आठ ग्रामीण और कोबरा बटालियन का एक जवान शामिल था. मारे जाने वालों में 3 बच्चे भी शामिल थे.

ग्रामीणों का आरोप था कि वे सभी गांव के देवगुड़ी में बीज त्योहार मनाने के लिए शिकार के बाद एकत्र हुए थे. उसी दौरान पुलिस मौके पर पहुंची. इसके बाद पुलिस ने उन पर हमला कर आठ ग्रामीणों को गोलियों से भून दिया. मारे गए ग्रामीणों में गुडूकारम (10), पाण्डू कारम (45), बहादुर (12), जोगा कारम (40), कारम चोमू (52), पूनेम सोनू (40), पूनेम लखमा (15 वर्ष), कारम मासा (50) शामिल थे.

इस घटना में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के लापता होने की भी खबरें आई थी. कहा गया था कि कम से कम 22 गांव वाले लापता हैं.

इस मुठभेड़ को लेकर शुरु से ही विवाद था. कांग्रेस पार्टी के अलावा मानवाधिकार संगठन भी इस घटना को लेकर आक्रोशित थे.

बाद में ग्रामीणों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार ने जस्टिस व्हीके अग्रवाल की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग भी गठित की थी.

इसके अलावा रमन सिंह की सरकार ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता राशि भी देने के निर्देश दिये थे. अजीत जोगी ने तब सवाल उठाये थे कि अगर राज्य सरकार मारे गये गांव वालों को माओवादी मानती है तो उन्हें फिर मुआवजा क्यों दे रही है.

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