हाईकोर्ट में 12 वरिष्ठ अधिवक्ताओं के चयन के ख़िलाफ़ याचिका

बिलासपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 12 वरिष्ठ अधिवक्ताओं के चयन को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई है.

इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि 12 वरिष्ठ अधिवक्ताओं के चयन के लिए जिस विधि को लागू किया गया था, वह पक्षपात, भाई-भतीजावाद से ग्रस्त है और कानून के स्थापित सिद्धांतों के खिलाफ है.


हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता बादशाह प्रसाद सिंह द्वारा, अधिवक्ता राजेश कुमार केशरवानी के माध्यम से यह याचिका दायर की गई है.

वरिष्ठ अधिवक्ता के लिए बादशाह प्रसाद सिंह ने भी आवेदन किया और साक्षात्कार दिया था. लेकिन उनका उन्हें ‘वरिष्ठ’ अधिवक्ता के लिए नहीं चुना गया.

याचिका में आरोप लगाया गया है कि वकीलों को वरिष्ठ पदनाम देने के उद्देश्य से गठित समिति पर्याप्त निष्पक्ष नहीं थी और कार्यवाही के प्रत्येक चरण से केवल पक्षपात के सिद्धांत को ही अपनाया गया.

याचिका में इंदिरा जय सिंह बनाम सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया का हवाला देते हुए कहा गया है, ‘वरिष्ठ अधिवक्ताओं का पदनाम अब सत्ता में रहने वालों द्वारा एक मनमाना अभ्यास बन गया है और वर्तमान मामले में भी कुछ व्यक्ति जो सत्ता में थे और समिति के सदस्य भी थे, उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया है.’

याचिका में कहा गया है कि इस प्रक्रिया में, महाधिवक्ता प्रत्येक अधिवक्ता के साक्षात्कार के सदस्य थे और उनके साक्षात्कार के समय, उनके कनिष्ठ और अधीनस्थ को समिति का सदस्य बनाया गया था. यह कानून और शक्ति की प्रक्रिया के दुरुपयोग को दर्शाता है.

याचिका में कहा गया है कि यह गैर-पारदर्शिता और बेईमानी के बराबर है और कानून की समानता के सिद्धांत का उल्लंघन किया गया.

याचिका में 12 अधिवक्ताओं को ‘वरिष्ठ अधिवक्ता’ प्रदान करने वाली अधिसूचना को रद्द करने और अदालत के समक्ष याचिका के लंबित रहने तक उपाधि प्रदान करने को स्थगित करने की मांग की गई है.

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