छत्तीसगढ़ सरकार ने किया खंडन, UAPA में 2 नहीं 90 मामले दायर किए

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार ने संसद के आंकड़ों का खंडन करते हुए कहा है कि कांग्रेस शासनकाल में राज्य में 2019 में UAPA के अंतर्गत 2 नहीं, 90 मामले दायर किये गये थे. इसमें 387 लोगों को आरोपी बनाया गया है.

छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 2019 से 2021 तक UAPA के तहत 214 मामले दर्ज़ किए गये हैं. इसके तहत 1246 लोगों को आरोपी बनाया गया है.


छत्तीसगढ़ ख़बर ने लोकसभा में 9 मार्च 2021 को दिए गये एक जवाब के आधार पर लिखा था कि UAPA के तहत छत्तीसगढ़ में 2015 से 2018 तक कुल 15 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. लेकिन 2019 में यह आंकड़ा दुगने से अधिक हो गया.

संसद के आंकड़े के आधार पर ख़बर में कहा गया था कि छत्तीसगढ़ में पिछले पांच सालों में UAPA के तहत सर्वाधिक लोग कांग्रेस शासनकाल में गिरफ़्तार किए गये हैं. अकेले 2019 में छत्तीसगढ़ में 32 लोगों को UAPA के तहत गिरफ़्तार किया गया था.

लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के आधार पर इस ख़बर में कहा गया था कि 2015 में राज्य में गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के अंतर्गत 2 मामले दर्ज़ किए गये थे. इसमें 3 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. इसी तरह 2016 में 3 और 2017 में 1 मामला दर्ज किया गया. इसमें क्रमश: 5 और 3 लोगों को गिरफ़्तार किया गया.

संसद में दिए गये जवाब के आधार पर ख़बर में कहा गया था कि 2018 में UAPA के अंतर्गत 10 मामले दर्ज किए गये. हालांकि मार्च 2021 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इसमें 4 लोगों की ही गिरफ़्तारी हो पाई थी. 2019 में इस क़ानून के अंतर्गत लोगों की गिरफ़्तारी के सारे आंकड़े टूट गये. इस साल भले दर्ज मामलों की संख्या 2 थी लेकिन गिरफ़्तार लोगों की संख्या 32 पहुंच गई थी.

संसद के आंकड़ों पर आधारित ख़बर का खंडन

राज्य सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा भेजे गये खंडन में कहा गया है कि कुछ मीडिया पोर्टल में वर्तमान शासन काल में विधिविरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम (UAPA) के तहत सर्वाधिक गिरफ़्तारी के संबंध में प्रकाशित की जा रही ख़बर निराधार एवं बेबुनियाद है.

इस खंडन में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ राज्य में पूर्व शासन काल के दौरान वर्ष 2013 से लेकर 2018 तक विधिविरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम (UAPA) के तहत कुल 583 प्रकरणों में 87 व्यक्तियों की गिरफ़्तारी की गई.

राज्य सरकार द्वारा जारी खंडन के अनुसार- दूसरी ओर वर्तमान सरकार द्वारा लगभग विगत 03 वर्षों में विधिविरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम (UAPA) के तहत 214 प्रकरण पंजीबद्ध किये गये और उनमें भी गंभीरतापूर्ण विवेचना के दौरान सिर्फ 93 व्यक्तियों के ख़िलाफ़ उपलब्ध साक्ष्य/ सबूतों के आधार पर कार्यवाही की गई.

छत्तीसगढ़ में UAPA के रिकार्ड मामले

छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये आंकड़ों के अनुसार 2019 में राज्य में UAPA के अंतर्गत 90 मामले दर्ज किये गये थे.

इसमें 387 लोगों को आरोपी बनाया गया और इनमें से 47 लोग गिरफ़्तार किए गये. इसके अलावा इसमें 340 लोग फरार हैं. इनमें से अभी भी केवल 72 मामलों की विवेचना चल रही है, जबकि 18 मामले विचाराधीन हैं.

इसी तरह 2020 में छत्तीसगढ़ में UAPA के अंतर्गत 67 मामले दर्ज किए गये. इनमें 357 लोगों को आरोपी बनाया गया. जिसमें 32 लोगों की गिरफ़्तारी हुई है और 325 लोग अभी भी फरार हैं.

इनमें से 57 मामलों की विवेचना जारी है, जबकि 10 मामले विचाराधीन हैं.

2021 में अब तक UAPA के अंतर्गत 57 मामले दर्ज किए गये हैं, जिसमें 502 लोगों को आरोपी बनाया गया है. इनमें से केवल 14 लोगों की गिरफ़्तारी हो पाई है, जबकि 488 लोग अब भी फरार हैं. इन सभी मामलों में जांच चल रही है.

कांग्रेस शासनकाल में कुल मामलों की बात करें तो 2019 से अब तक UAPA के 214 मामले दर्ज किए गये हैं, जिसमें 1246 लोगों को आरोपी बनाया गया है. इसमें 93 लोगों की गिरफ़्तारी हुई है, जबकि 1153 लोग फरार हैं. इन तीन सालों में 186 मामलों की विवेचना जारी है, जबकि 28 मामले अब भी विचाराधीन हैं.

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