सदियों से नहीं खेली जाती होली

रायगढ़ | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के 8 गांवों में होली नहीं खेली जाती है. न ही यहां होलिका दहन होता है. पिछले करीब 150 साल से इन गांवों में यह परंपरा चली आ रही है. जब दूसरे गांवों में होली खेली जाती है तो यहां सन्नाटा पसरा रहता है. लोग डरे हुये से रहते हैं तथा गम का साया बना रहता है.

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के हट्टापाली, मंजूरपाली, छिंदपतेरा, जगदीशपुर गांव के लोगों का मानना है कि होली खेलने से देवता नाराज हो जाते हैं. इससे गांव में सूखा सहित कई प्राकृतिक विपदायें आती हैं. छिंदपतेरा गांव में करीब 150 साल पहले बाघ आकर गांव के बैगा को उठा ले गया था, उस साल वहां सूखा भी पड़ा था. उसके बाद से यहां होली खेलना बंद है.


डोंगरीपाली, परसकोल तथा बेहराबहाल में सालों से होली नहीं खेली जाती है. यहां पर भी होली के समय मौत हो गई थी. यहां के बुजुर्ग बताते हैं कि तबसे यहां होली खेलना बंद हो गया है.

बरमकेला विकासखंड के साल्हे ओना गांव में होलिका दहन से पहले ही होली खेलने का रिवाज है. कई दशकों पहले होलिका दहन के दिन गांव में आग लग गई थी जिसकी चपेट में पूरा गांव आ गया था. उसके बाद से फाल्गुन माह लगते ही शनिवार या मंगलवार को होली खेल ली जाती है. उससे पहले यहां शांति पाठ करा लिया जाता है.

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