छत्तीसगढ़ में बनी ‘नेकी की दीवार’

कोरबा | अब्दुल असलम: छत्तीसगढ़ में भी ‘नेकी की दीवार’ बनती जा रही है. सबसे छत्तीसगढ़ में इसकी शुरुआत की खबर बसना से आई. अब कोरबा में भी उसी के तर्ज पर ‘नेकी की दीवार’ बन गई है. दऱअसल यह एक नेक काम है जिसकी शुरुआत ईरान से हुई है. जहां एक व्यक्ति ने गरीब लोगों को ठंड से बचाने के लिए इस प्रकार की मुहिम शुरू की थी. ईरान के लोगों को इस प्रकार का आइडिया इतना पसंद आया कि जगह-जगह पर इस प्रकार की शुरुआत हो गई और जरूरतमंदों को भी काफी चीजों का आराम हो गया.

खुशी की बात यह है कि यह दीवार अब भारत में भी बना दी गई है. राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में यह परंपरा शुरू हो चुकी है. इसके अलावा हरियाणा के कैथल और मध्यप्रदेश के झाबुआ में भी इस प्रकार की दीवार देखी गई है. देखा जाये तो यह एक बहुत ही अनूठा प्रयास है. जिसमें जरूरतमंदों की मदद हो जाती है.


अब छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर में भी एक दीवार ऐसी है, जहां जरूरत का हर सामान बिना किसी कीमत के मिल जाता है. यहां न तो कोई देने वाला होता और न ही किसी से पूछने की आवश्यकता है. बस जिसकी जैसी जरूरत, वह वैसी चीज ले जाये. इस दीवार में उनका स्वागत है, जिनके घर पर रखे ऐसे सामान, जिनकी उन्हें तो जरूरत नहीं, पर किसी और के लिए कीमती हो सकता है, उसे वे स्वेच्छा से यहां छोड़ जाते हैं.

कोरबा के डीडीएम रोड पर सड़क के दाहिनी ओर स्थित नेकी की सोच के साथ स्थापित की गई ‘नेकी की दीवार’ एक सप्ताह पहले ही अस्तित्व में आई. पृथ्वी सेवा मिशन के बैनर तले एकजुट हुये शहर के कुछ नेकदिल नागरिकों ने ‘नेकी की दीवार’ बनाई है. समाज के लिये कुछ बेहतर करने की मंशा लेकर उन्होंने पहले उस वर्ग को फोकस किया, जिनके पास घर-परिवार चलाने के साज-ओ-सामान की कमी नहीं बल्कि घर पर जगह घेर रखे उन सामानों की अब उन्हें कोई जरूरत नहीं रही.

छोटा और तंग हो चली पुरानी कमीज-पतलून, गर्म कपड़े, पेन, कॉपी-पेंसिल, बच्चों के कंपास, स्कूल बैग, जूते-चप्पल, शॉल-चादर से लेकर टीवी और साइकिल तक सब कुछ इसमें शामिल है.

पृथ्वी सेवा मिशन के संस्थापक मनोज मिश्रा का कहना है कि इस मिशन के लिए रुपये-पैसे की जरूरत नहीं, केवल ज्यादा से ज्यादा लोगों का सहयोग अपेक्षित है. सभी से केवल यही निवेदन है कि वे अपने घर पर पड़ी उन चीजों को लायें, जिनकी उन्हें कोई जरूरत नहीं है. उनके लिए बेकार हो चुके वही सामान किसी दूसरे के लिए अनमोल साबित हो सकता है, यही उनका मूल उद्देश्य है.

पृथ्वी सेवा मिशन के संस्थापक बॉब का कहना है कि कई बार लोग सहयोग देना चाहते हैं, लेकिन काम-काज की व्यस्तता में वे पहुंच नहीं पाते है. मिशन की ओर से उनके लिए एक विकल्प भी है अगर ‘नेकी की दीवार’ तक सामान पहुंचाने का वक्त भी नहीं हो तो उनके घर जाकर कलेक्शन करने की सुविधा भी है. ‘नेकी की दीवार’ पर लिखे नंबरों के जरिये संपर्क किया जा सकता है.

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