छत्तीसगढ़ की आर्थिक स्थिति ख़राब, सीएम ने लिखी चिट्ठी

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने केंद्र को पत्र लिख कर और अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है. उन्होंने केंद्र की मदद नहीं मिलने की स्थिति में राज्य की योजनाओं के क्रियान्वयन नहीं होने की चेतावनी दी है.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी चिट्ठी में साफ़ लिखा है कि राज्य को वैधानिक अधिकार होने के बाद भी विभिन्न कारणों से वित्तीय कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है. राज्य के गरीबों, मजदूरों, किसानों, महिलाओं एवं समाज के अन्य वर्गों के कल्याण हेतु चलाई जा रही योजनाओं का क्रियान्वयन संभव नहीं हो सकेगा.


भूपेश बघेल ने केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर कहा है कि राज्य सरकारों के पास वित्तीय संसाधन सीमित है. कोविड के कारण विगत दो वर्षों में राज्य की आय में बड़ी कमी हुई है जिससे राज्य को लोककल्याणकारी योजनाओं के संचालन में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि कि 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर राजस्व घाटा अनुदान ऐसे राज्यों को दिया जा रहा है, जो वर्ष 2020-21 से 2025-26 के पूर्व के 5 या अधिक वर्षों से लगातार बड़े राजस्व घाटे में रहे हैं. यदि यह अनुदान राज्यों को खराब वित्तीय स्थिति से उबरने के उद्देश्य से दिया जा रहा है, तो इसे पूर्व के वर्षों के राजस्व घाटे को आधार मानकर देने की बजाए वर्ष 2020-25 की अवधि में होने वाले राजस्व घाटे की प्रतिपूर्ति के आधार पर दिया जाना चाहिए.

जीएसटी को लेकर मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार जिन राज्यों को जीएसटी कर प्रणाली लागू होने के पश्चात राजस्व की हानि हुयी है, उन्हें जुलाई 2017 से जून 2022 तक केवल 05 वर्ष के लिये ही क्षतिपूर्ति अनुदान दिये जाने की व्यवस्था है. राज्य को चालू वित्त वर्ष में जीएसटी क्षतिपूर्ति मद में लगभग 6,500 करोड़ की प्रतिपूर्ति प्राप्त होना अनुमानित है किन्तु आगामी वित्त वर्ष 2022-23 में यह राशि केवल प्रथम तिमाही (अप्रैल से जून) तक ही केन्द्र से प्राप्त होगी, जो कि लगभग 1,700 करोड़ होगी.

अगले पांच साल तक जीएसटी क्षतिपूर्ति जारी रखने का अनुरोध करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा है कि आगामी वर्ष में राज्य को लगभग 5,000 करोड़ के राजस्व की हानि की भरपाई की कोई व्यवस्था अभी तक केन्द्र द्वारा नहीं की गयी है जबकि हमारे द्वारा 15 वें वित्त आयोग एवं केन्द्र सरकार का ध्यान पूर्व में भी इस और आकृष्ट किया जा चुका है.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2014 में निरस्त किए गये कोल खदानों की 295 रुपये प्रति टन की पेनाल्टी को भी राज्यों को दिये जाने का अनुरोध करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि इससे छत्तीसगढ़ को भी 4,140 करोड़ रूपये प्राप्त होंगे.

राज्य में हर वर्ष लाखों टन धान सड़ने से चिंतित मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि राज्य में 08 निजी निवेशकों के साथ 12 करोड़ लीटर प्रति वर्ष से अधिक ईथेनॉल उत्पादन के लिये एमओयू निष्पादित किया जा चुका है. इससे लगभग 05 लाख मीट्रिक टन अतिशेष धान की खपत हो सकेगी. इसके लिये केन्द्र सरकार की सहमति आवश्यक है. धान इथेनॉल बनाने की अनुमति तत्काल दी जाये तथा धान खराब होने से हो रही ’राष्ट्रीय क्षति’ तथा राज्य को हो रही बड़ी आर्थिक क्षति से बचाया जा सके.

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ को भी कम से कम 24 लाख मीट्रिक टन उसना चावल, एफसीआई द्वारा लेने का लक्ष्य दिए जाने का अनुरोध निर्मला सीतारमण से किया है. उन्होंने अपने पत्र में डीजल एवं पेट्रोल पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क के स्थान पर केन्द्र द्वारा अधिरोपित सेस की राशि समाप्त करने या कम करने का भी प्रस्ताव दिया है.

भूपेश बघेल ने पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों के साथ पत्र में लिखा है कि छतीसगढ़ को केन्द्रीय बजट में अंतरण हेतु प्रावधानित राशि के विरूद्ध 13,089 करोड़ रूपये कम प्राप्त हुए हैं, जिससे राज्य के संसाधनों पर अत्यधिक दवाब की स्थिति निर्मित हुई है. राज्य के हिस्से के 42 प्रतिशत राजस्व की तुलना में मात्र 34 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त हुआ है.

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय योजनाओं में केन्द्रांश में 11 प्रतिशत की औसत कमी का हवाला देते हुए कहा है कि यह भार राज्यांश के रूप में राज्य पर आर्थिक भार बढ़ा रहा है.

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