छत्तीसगढ़: दारू मिल रही, दवा नहीं

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ में नोटबंदी से मरीज सबसे ज्यादा परेशान हैं. छत्तीसगढ़ में कोई भी दवा दुकानदार 500 और 1000 के पुराने नोट लेने को तैयार नहीं है. सरकार ने जब से इन नोटों को अवैध घोषित किया है तब से मरीज इन नोटों को लेकर भटक रहें हैं. वहीं, निजी चिकित्सक भी इन नोटों से परहेज कर रहें हैं.

कुछ दवा दुकानों, खासकर बड़े दवा दुकानों में स्वाइप की मशीनें लगी हुई हैं वहां कार्ड से दवा खरीदी जा सकती है. हालांकि, दवा दुकानदार भी 100-50 रुपये के लिये स्वाइप मशीन का की सुविधा को टाल रहें हैं. अन्यथा मरीजों को पहले पहले अपने नोट बदलवाने पड़ रहें हैं तब जाकर उन्हें दवा मिल रही है.


केवल पुराने ग्राहकों को पुराने दुकानदार उधार दे रहें हैं. यहां पर ‘नहीं मामा से काना मामा अच्छा’ वाली कहावत चरितार्थ हो रही है. याने आज नहीं तो कल तो पैसा मिल ही जायेगा.

जब भी कोई चिकित्सक या दवा दुकानदार के पास जाता है तो माना जाता है कि मामला आपातकालीन है. यहां तक की सभी तरह के हड़ताल तथा बंद के दौरान इनको खुले रखने की छूट मिलती है. जिन हड़तालियों पर जनता को परेशान करने का आरोप लगता है वे भी मरीजों का ख्याल रखते हैं परन्तु मोदी सरकार के नोटबंदी से वही मरीज हलाकान हो रहें हैं.

उस पर रोज-बरोज नये-नये नियमों की घोषणा हो रही है. जिससे पूरा देश कन्फ्युजिया गया है.

उधर, दारू दुकान का मामला दूसरा है. वहां पर धड़ल्ले से 500 और 1000 के पुराने नोट लिये जा रहें हैं. राजधानी रायपुर में हिन्दी के एक दैनिक अखबार द्वारा किये गये स्टिंग ऑपरेशन से इसका खुलासा हुआ है. हां, कुछ दारू दुकानदार पूरे 500 रुपये का या उससे अधिक से अधिक दारू लेने का दबाव जरूर बनाते पाये गये हैं.

अब जब मामला नशे-पानी का हो तो एक साथ कई बोतले लेकर रख लेने में नुकसान क्या है. हां, दारू पीकर यदि बीमार पड़ गये तो मामला दूसरा हो जायेगा.

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