छत्तीसगढ़: 4.7% दवायें सब स्टैंटर्ड

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में 4.7% दवायें सब स्टैंटर्ड पाई गई हैं. जबकि राष्ट्रीय स्तर पर सब स्टैंडर्ड दवा पाये जाने का औसत 3.16% है. इस तरह से छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय औसत से ज्यादा सब स्टैंडर्ड की दवायें पाई गई हैं. राष्ट्रीय जैव संस्थान, नोएडा द्वारा देश में ’नकली और अमानक क्वालिटी की औषधियों’ की समस्याओं की सीमा के संबंध में कराये गये सर्वेक्षण (2014-16) से संबंधित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार देश के 16 राज्यों में कराये गये सर्वेक्षण में सब स्टैंडर्ड दवा पाये जाने के मामले में छत्तीसगढ़ 8वें पायदान पर है.

जहां तक नकली दवा का संबंध है देशभर में महज 0.0245% दवायें ही नकली पाई गई हैं. इस तरह से भारत में नकली दवा पाये जाने की मात्रा नगण्य है. जबकि विदेशी एजेंसिया जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन भी शामिल है के अनुसार भारत में इससे कई गुना ज्यादा नकली दवाईयां पाई जाती हैं. दावा किया जाता है कि भारत में करीब 25% दवायें नकली पाई जाती हैं.


दरअसल, विदेशी बंहरगाहों पर भारत से भेजे जाने वाली दवाओँ को पेटेंट कानून के उल्लंघन के कारण कई बार जब्त किया गया है. विदेशी एजेंसियां उन्हें भी नकली कहती हैं. हालांकि, वे दवायें भारतीय पेटेंट कानून के अनुसार गैर-कानूनी नहीं होती हैं तथा उनकी क्वालिटी भी एकदम सही होती है.

इन सब दावों और प्रतिदावों के बाद भारत सरकार ने खुद दवाओं का सर्वेक्षण कराया है. जिससे विदेशी एजेंसियों के दावे झूठे साबित हुये हैं.

नकली दवा उन्हें कहां जाता है जिसमें दवा के स्थान पर अन्य चीज होती हैं. इसी तरह से सब स्टैंडर्ड दवा उन्हें कहा जाता है जिनमें मात्रा से कम या कम असरकारी दवा होती है. दोनों ही स्थिति में दवा इसलिये खतरनाक होती हैं क्योंकि उनसे वांछित असर नहीं मिलता है.

देश में सबसे ज्यादा सब स्टैंडर्ड दवा पंजाब में 6.6%, उसके बाद उत्तारखंड में 6.19%, गुजरात में 5.9% मिलती हैं. सबसे कम सब स्टैंडर्ड दवा दिल्ली में 1.62% पाई गई हैं. उसके बाद पश्चिम बंगाल में 1.86% तथा चंडीगढ़ में 2.17% पाई गई हैं.

इस सर्वे में छत्तीसगढ़ से 828 दवाओँ के सैंपल लिये गये थे जिनमें से 39 सब स्टैंडर्ड निकले हैं. मीडिया रिपोर्टस के अनुसार छत्तीसगढ़ में एक भी दवा नकली नहीं पाई गई हैं.

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार जिन दवाओँ के सैंपल लिये गये हैं उनमें पैरासिटामॉल, आईब्रूफेन, मेटफार्मिन, एमॉक्सिसिलीन, सिप्रोफ्लॉक्सासिन, एजिथ्रोमाइसिन, डाइक्लोफेन, निमूसूलाइड, ओफ्लाक्सॉसिन, एटेनोनोल, एमलोडिपीन व इकोस्प्रीन शामिल हैं.

हैरत की बात है कि इऩ सैंपलों में शुगर की केवल एक दवा तथा उच्च रक्तचाप की केवल दो दवाओं तथा हार्ट की एक दवा को शामिल किया गया है. एंटीबायोटिक्स में भी सामान्य तौर पर उपयोग में लाई जाने वाली दवायें ही शामिल है.

जबकि इन सैंपलों में न तो जीवनरक्षक के तौर पर दी जाने वाली आईवी फ्लुइड्स शामिल है न ही मेनोपेनेम जैसी उच्च एंटीबायोटिक शामिल हैं. यहां तक कि हृदयाघात के समय दी जाने वाली सौरबीट्रेट तक इसमें शामिल नहीं हैं.

सब स्टैंडर्ड दवायें

पंजाब- 6.66%
उत्तराखंड- 6.19%
गुजरात- 5.9%
हिमाचल प्रदेश- 5.5%
केरल- 5.02%
उत्तरप्रदेश- 5.41%
हरियाणा- 4.9%
छत्तीसगढ़- 4.7%
बिहार- 3.82%
आंध्रप्रदेश- 4.02%
कर्नाटक- 3.77%
महाराष्ट्र- 3.7%
झारखंड- 2.47%
चंडीगढ़- 2.17%
पश्चिम बंगाल- 1.86%
दिल्ली- 1.62%

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