नक्सल मामले के नेत्रहीन गवाह की होगी जांच

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार एक नेत्रहीन को माओवादी मामले का गवाह बनाने के मामले की जांच कर सकती है. पुलिस ने माओवादियों के हमले के गवाह के रुप में एक नेत्रहीन को अदालत की देहरी पर पेश कर दिया था. लेकिन सरकारी वकील ने नेत्रहीन गवाह को देखने के बाद पुलिस को समझाया और उसे गवाह के बतौर अदालत में पेश होने से रोक दिया.

माओवाद प्रभावित सुकमा जिले की चिंतागुफा थाना पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 307 और 3, 5 विस्फोटक अधिनियम के तहत जिसे गवाव बनाया था, उसके कोर्ट में पहुंचने पर सरकारी वकील के हाथ-पैर फुल गये. बुरकापाल निवासी 40 वर्षीय माड़वी नंदा को सेशन ट्रायल नंबर 59/17 पर 30 नवंबर 2017 को समंस जारी किया था. इसके अनुसार माड़वी को 8 जनवरी को दंतेवाड़ा न्यायालय में पेश होना था. इस मामले में जब नेत्रहीन माड़वी नंदा अपनी 9 साल की बच्ची के साथ अदालत पहुंचे तो सरकारी वकील को पता चला कि जिसे पुलिस ने इस महत्वपूर्ण मामले में गवाह बनाया था, वह तो नेत्रहीन है.


माड़वी नंदा के अनुसार उसे पुलिस वाले यह कह कर दंतेवाड़ा बुलाये थे कि अगर अदालत नहीं पहुंचोगे तो तुम्हें जेल हो जायेगी. पुलिस ने उसे गांव से आने-जाने का किराया देने का वादा भी किया था. लेकिन जब सरकारी वकील ने उसकी गवाही के लिये मना कर दिया तो पुलिस उसे उसी हालत में छोड़ कर वहां से चली गई. अपनी 9 साल की बेटी के साथ अदालत पहुंचे माड़वी नंदा कई घंटों तक गांव वापसी के लिये भटकते रहे क्योंकि उनके पास किराये के लिये पैसे नहीं थे.

छत्तीसगढ़ में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उठने वाले इन सवालों को लेकर सरकार ने चिंता जताई है और माना जा रहा है कि सरकार इन मामलों की जांच कर सकती है.हालांकि सूत्रों का कहना है कि सरकार इस तरह के मामलों को लेकर होने वाली किरकिरी से नाराज है लेकिन इसकी जांच की घोषणा सार्वजनिक कर के वह मामले को और तूल नहीं देना चाहती है.

सप्ताह भर पहले ही यह जानकारी सामने आई थी कि जगदलपुर का रहने वाले सोमेश पाणिग्रही को पुलिस ने लगभग 300 मामलों में अपना गवाह बनाया है. इसी तरह छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तेलीबांधा थाने में मनोहर वर्ल्यानी को पुलिस ने 231 मामलों में गवाह बनाया है. मनोहर का दावा है कि छत्तीसगढ़ में ऐसे गवाह बड़ी संख्या में हैं, जो सैकड़ों मामलों के गवाह बने हुये हैं.

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