बाबा रामदेव पर कर चोरी के आरोप

नई दिल्ली | संवाददाता: बाबा रामदेव पर कर चोरी और काला धन खपाने के कई मामले रहे हैं. लेकिन बाबा रामदेव इन आरोपों को महज राजनीतिक आरोप बता कर खारिज करते रहे हैं. हालांकि काला धन पर चुनाव के समय का एक वीडियो टेप उनकी काफी किरकिरी करवा चुका है. लेकिन 11 जनवरी 1971 को महेंद्रगढ़ ज़िले के सैयदपुर इलाके में जन्में रामकृष्ण यादव यानी बाबा रामदेव और उनसे जुड़े लोगों पर कर चोरी और आर्थिक घपलों के मामले बाबा रामदेव की उम्र से भी कहीं अधिक हैं. यूं तो ज़मीन ख़रीदी में कई गड़बड़ियों के मामले तो बाबा और उनके चेलों-चपाटों पर हैं ही, दवाओं में गड़बड़ी के लिये भी बाबा रामदेव पर जुर्माना और आरोप लगते रहे हैं.

बाबा रामदेव जब 2004 में अपने योग के कारण देश भर में चर्चा में थे और देश के अलग-अलग हिस्सों में योग शिविर लगा कर लोगों को योग के प्रति प्रेरित कर रहे थे, उस दौर में ही बाबा रामदेव पर कर चोरी का पहला मामला सामने आया था.


बाबा रामदेव और उनके परम मित्र बालकृष्ण की दिव्य फार्मेसी ने 2004 के वित्तीय वर्ष में बताया कि उनकी संस्था ने 6 लाख 73 हज़ार रुपये की दवायें बेची हैं. इसके एवज में सरकार को 54 हज़ार रुपये का बिक्री कर भी चुकाया गया. लेकिन जब वाणिज्य कर विभाग ने आंकड़े खंगालने शुरु किये तो दिव्य फार्मेसी का झूठ सामने आने लग गया.

वाणिज्य कर विभाग के आंकड़ों की मानें तो दिव्य फार्मेसी ने उस वित्तीय वर्ष में केवल हरिद्वार के डाक विभाग से 3353 पार्सल भेजे थे. इसके अलावा 13 लाख 13 हज़ार रुपये के वीपीपी पार्सल भेजे गये थे सो अलग. डाकघरों के आंकड़ों से पता चला कि दिव्य फार्मेसी के पास उस साल 17 लाख 50 हज़ार रुपये के आसपास का मनीआर्डर भी आया था. इसके बाद दिव्य फार्मेसी पर छापा मारा गया और पांच करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री कर चोरी पकड़ी गई.

हालांकि बाबा रामदेव और दिव्य फार्मेसी वाणिज्य कर विभाग के इस छापे मारी को राजनीति से प्रेरित बताते हैं. लेकिन इस कर चोरी के अलावा स्टांप चोरी के दर्जनों मामले हरिद्वार में चल रहे हैं. दिव्य फार्मेसी और उससे संबद्ध संस्थानों पर 50 लाख रुपये से अधिक के जुर्माने लग चुके हैं. मुक़दमों की संख्या भी कम नहीं है.

तहलका में प्रकाशित मनोज रावत की रिपोर्ट की मानें तो बेनामी और काला धन से ज़मीन खरीदने के मामलों की एक लंबी फेहरिश्त है. बाबा रामदेव और बालकृष्ण के रिश्तेदारों, मित्रों और कर्मचारियों के नाम पर ज़मीन ख़रीदने के कई मामले अदालत में हैं.

बालकृष्ण के पीए गगन कुमार ने शांतरशाह नगर में 1.446 हेक्टेयर ज़मीन 35 लाख रुपये में खरीदी. इसके अलावा बाबली-कलंजरी में 1 करोड़ 37 लाख रुपये की जमीन भी गगन कुमार के नाम पर खरीदी गई. अब दिलचस्प ये है कि गगन कुमार की तनख्वाह केवल 8 हज़ार रुपये मासिक है और उन्होंने ज़मीन की खरीदी जब तक की थी, तब तक वे आयकर रिटर्न भी नहीं भरते थे.

जाहिर है, बालकृष्ण या बाबा रामदेव लगातार कहते रहे हैं कि वे इस तरह के ‘सरकारी दुष्चक्रों’ से नहीं डरने वाले और सारी चीजों का जवाब उनके पास है. वे सारे आरोपों को झूठा बताते हैं. लेकिन देश के सर्वाधिक शक्तिशाली योग गुरु बाबा रामदेव और देश के 50 बड़े पूंजीपतियों में शामिल बालकृष्ण पर चलने वाले मुक़दमों का क्या हश्र होता है, यह तो वक्त ही बतायेगा.

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