राष्ट्र

मोदी की रैली पर हो सकती है रोक

लखनऊ | एजेंसी: उत्तरप्रदेश में नरेंद्र मोदी की रैली को सरकार रोक सकती है. उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में हुई हिंसा के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की उप्र में होने वाली रैलियों को लेकर भाजपा और राज्य की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी सरकार आमने-सामने आ गए हैं. सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि ऐसा लगा कि मोदी की रैलियों के बहाने भाजपा उप्र का माहौल खराब करना चाहती है तो उसे इसकी इजाजत नहीं दी जाएगी.

उप्र के कारागार मंत्री एवं खाद्य रसद मंत्री राजेंद्र चौधरी ने मंगलवार को कहा, “उप्र में किसी भी सूरत में भाजपा को माहौल खराब करने की इजाजत नहीं दी जाएगी. मोदी हों या कोई और, रैलियों के बहाने यदि कोई उप्र का माहौल खराब करने की कोशिश करेगा तो उससे सख्ती से निपटा जाएगा.”

चौधरी ने कहा, “अभी रैलियों पर रोक नहीं लगाई गई है, लेकिन इस बारे में जानकारी एकत्र की जा रही है कि कहीं रैलियों के पीछे भाजपा की मानसिकता सूबे का माहौल खराब करने की तो नहीं है. यदि ऐसा हुआ तो कानून अपना काम करेगा और सरकार सख्ती से निपटेगी.”

इस बीच भाजपा ने भी सरकार के रवैये को अलोकतांत्रिक करार देते हुए पलटवार किया है. भाजपा ने कहा कि सपा सरकार उप्र में लोकतंत्र को समाप्त करना चाहती है.

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा, “सूबे में जब सपा की सरकार बनी थी, तब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि उप्र में लोकतंत्र का उदय हुआ है. अब यदि राजनीतिक पार्टियों को रैली की ही इजाजत नहीं दी जाएगी तो नेता क्या करेंगे और पार्टियां क्या करेंगी.”

उन्होंने कहा, “राजनीतिक पार्टियां और नेता यदि रैली नहीं करेंगे और अपने कार्यक्रम नहीं करेंगे तो फिर पार्टी का काम कैसे चलेगा. सरकार अलोकतांत्रिक रवैया अख्तिायार करने में जुटी हुई है.”

पाठक ने सख्त लहजे में कहा कि पार्टी की घोषणा के अनुसार नरेंद्र मोदी की पहली रैली 15 अक्टूबर को कानपुर से शुरू हो रही है और वह अपने नियत समय पर ही होगी.

उल्लेखनीय है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने तय किया है कि उप्र में नरेंद्र मोदी की नौ रैलियां आयोजित की जाएंगी और इसकी शुरुआत कानपुर में 15 अक्टूबर से होगी. मोदी की अंतिम रैली राजधानी लखनऊ में 25 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस के मौके पर होगी.

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