राष्ट्र

कांग्रेस: जमानत के बाद ठोकी ताल

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: सोनिया गांधी और राहुल गांधी को पटियाला हाउस अदालत में जमानत मिल गई. दोनों कांग्रेस नेता पटियाला हाउस अदालत में महानगर दंडाधिकारी लवलीन के समक्ष पेश हुए, जहां से उन्हें 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत मिल गई.

दोनों कांग्रेस नेताओं की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने संवाददाताओं को बताया कि याचिकाकर्ता सुब्रमण्यम स्वामी ने दोनों कांग्रेस नेताओं की विदेश यात्रा पर रोक लगाने की याचिका दी थी, जिसे अदालत ने ठुकरा दिया.

सिब्बल ने सुनवाई के बाद संवाददाताओं से कहा, “हमने सभी आरोपियों की ओर से जमानत के लिए अदालत के समक्ष याचिका पेश की. अदालत ने बिना शर्त प्रत्येक आरोपी को 50,000-50,000 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी.”

उन्होंने कहा, “स्वामी ने आरोपियों की विदेश यात्रा पर कुछ शर्ते लगाने का अनुरोध किया. लेकिन अदालत ने उनका अनुरोध ठुकरा दिया.”

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 फरवरी, 2016 की तिथि निर्धारित की. उस दिन अदालत में इस मुद्दे पर दोपहर दो बजे सुनवाई होगी.

इसके तुरंत बाद सोनिया और राहुल गांधी अदालत परिसर से बाहर निकल गए.

अदालत ने भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सोनिया और राहुल को शनिवार को अदालत में पेश होने का आदेश दिया था.

स्वामी ने कांग्रेस के दोनों शीर्ष नेताओं पर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के यंग इंडिया लिमिटेड द्वारा अधिग्रहण में धोखाधड़ी का आरोप लगाया है. वाईआईएल में सोनिया और राहुल की 38-38 प्रतिशत की हिस्सेदारी है.

इस मामले के अन्य आरोपियों में कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा, गांधी परिवार के मित्र सुमन दुबे और पार्टी के अन्य नेता ऑस्कर फर्नाडीस और सैम पित्रोदा शामिल हैं.

इस मामले में दोनों कांग्रेस नेताओं को निचली अदालत ने समन भेजा था, जिसे रद्द करने के लिए उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी. हालांकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद निचली अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 19 दिसम्बर की तिथि निर्धारित की थी.

कांग्रेस ने ठोकी ताल-
कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने संवाददाताओं से कहा कि उन्हें विश्वास है कि स्वामी की इस याचिका के पीछे भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और मोदी का हाथ है.

आजाद ने नेशनल हेराल्ड मामले में अदालत में सोनिया और राहुल की पेशी से पहले कहा, “आपने आज अखबार में पढ़ा ही होगा कि सरकार ने किस तरह सुब्रमण्यम स्वामी को जेड श्रेणी की सुरक्षा दी और उन्हें सरकारी आवास उपलब्ध कराया गया है.”

आजाद ने कहा, “जेड श्रेणी की सुरक्षा और आधिकारिक निवास उन्हें पुरस्कार स्वरूप दिया गया है.”

उन्होंने कहा, “भाजपा और प्रधानमंत्री कांग्रेस नेतृत्व को निशाना बना रहे हैं, लेकिन हम डरेंगे नहीं.”

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा, “जिस तरह से मोदी सरकार विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है, हम संसद के अंदर और बाहर भी इसके खिलाफ लड़ेंगे.”

केन्द्र सरकार पर निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को नेशनल हेराल्ड मामले में पटियाला हाउस अदालत में पेशी और जमानत मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी इन सबसे डरती नहीं है और वह संघर्ष जारी रखेगी. अदालत से बाहर आने के बाद सोनिया ने संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी गरीबों के लिए संघर्ष जारी रखेगी.

उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार विपक्षियों को निशाना बनाने के लिए सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है. लेकिन हम डरे हुए नहीं हैं. हमारी लड़ाई जारी रहेगी. कांग्रेस की नीतियों और गरीबों के हित में हमारा संघर्ष जारी रहेगा.”

पार्टी उपाध्यक्ष राहुल ने भी प्रधानमंत्री मोदी पर विपक्षियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, “मोदी जी आरोप लगाते रहते हैं, लेकिन मैं और मेरी पार्टी नहीं झुकेंगे. हम गरीबों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.

नेशनल हेराल्ड केस-
– 1938 में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पंडित जवाहर लाल नेहरू ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से नेशनल हेराल्ड अखबार की शुरुआत की थी.

– अखबार को कांग्रेस के मुखपत्र के रूप में ‘एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड’ (एजेएल) द्वारा प्रकाशित किया जाता था. हालांकि दशकों बाद अखबार का सर्कुलेशन गिर गया और वित्तीय घाटे के चलते 2008 में 90 करोड़ रुपये के कर्ज के साथ अखबार को बंद कर दिया गया.

– एजेएल को बचाने के प्रयास में कांग्रेस पार्टी ने कंपनी को 2010 तक कुछ वर्षो के लिए बगैर किसी जमानत के ऋणमुक्त ब्याज दिया.

– 23 नवम्बर, 2010 को ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ नामक एक नई कंपनी ने एजेएल का अधिग्रहण कर लिया. इस कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित मोतीलाल वोरा, सुमन दुबे, ऑस्कर फर्नांडीस और सैम पित्रोदा को निदेशक बनाया गया.

– अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने एजेएल के लगभग 90 करोड़ रुपये के कर्ज को वाईआईएल के नाम स्थानांतरित करने का फैसला किया.

– दिसम्बर 2010 में वाईआईएल के नाम 90 करोड़ रुपये कर्ज के स्थानांतरण के एवज में एजेएल ने अपने सारे शेयर वाईआईएल को देने का फैसला किया. यंग इंडियन ने इस अधिग्रहण के लिए 50 लाख रुपये का भुगतान किया.

– इसके साथ ही कांग्रेस पार्टी की मूल रूप से 90 करोड़ रुपये की कर्जदार एजेएल, यंग इंडियन की पूर्ण स्वामित्व वाली एक सहायक कंपनी बन गई.

– दिसम्बर 2010 में राहुल गांधी को कंपनी का निदेशक बनाया गया और जनवरी 2011 में सोनिया गांधी भी निदेशक बनाई गईं. मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नाडीस भी उसी दिन कंपनी के निदेशक बनाए गए.

– दस्तावेजों के अनुसार, सोनिया और राहुल की इस कंपनी में 38-38 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि बाकी 24 प्रतिशत में वोरा और फर्नांडीस की बराबर-बराबर हिस्सेदारी है.

– 2012 में स्वामी ने निचली अदालत में एक शिकायत दायर की, जिसमें आरोप लगाया कि कांग्रेसी नेता वाईआईएल द्वारा एजेएल के अधिग्रहण में हुई धोखाधड़ी और विश्वासघात में लिप्त थे.

– स्वामी ने आरोप लगाया कि वाईआईएल ने गलत तरीके से लाभ के लिए और 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति की बंद कंपनी को हथिया लिया.

– स्वामी ने आरोप लगाया कि वाईआईएल ने 90.25 करोड़ रुपये की वसूली का अधिकार हासिल करने के लिए मात्र 50 लाख रुपये का भुगतान किया.

– महानगर दंडाधिकारी गोमनी मनोचा ने सोनिया, राहुल और अन्य को 26 जून, 2014 को समन जारी किया और कहा कि सभी आरोपियों ने तथाकथित उद्देश्यों की पूत्रि के लिए एक-दूसरे के साथ मिलकर कथित रूप से काम किया. अदालत ने सभी आरोपियों को सात अगस्त, 2014 को पेश होने के लिए कहा था.

– 30 जुलाई, 2014 को कांग्रेसी नेताओं ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसने समन पर रोक लगा दी.

– सात दिसम्बर, 2015 को उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेताओं द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी और कहा कि प्रथम ²ष्टया मामले में आपराधिकता के साक्ष्य हैं.

– उच्च न्यायालय ने कांग्रेस पार्टी द्वारा एजेएल को जारी प्रारंभिक ऋण की वैधता के संबंध में भी सवाल उठाए.

– उच्च न्यायालय के आदेश के बाद आठ दिसम्बर को निचली अदालत ने सभी आरोपियों को 19 दिसम्बर को पेश होने का आदेश दिया.

– लखनऊ के अखबारों में शुक्रवार को एक नोटिस प्रकाशित हुआ था, जिसमें एजेएल को एक गैर-लाभकारी कंपनी में बदलने के लिए 21 जनवरी, 2016 को कंपनी की एक असाधारण आम बैठक की जानकारी दी गई थी.

error: Content is protected !!