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8 आदिवासियों की रिहाई की मांग

रायपुर | संवाददाता: मूलनिवासी बचाओ मंच ने छत्तीसगढ़ के बीजापुर और सुकमा में कैंप विरोधी प्रदर्शन में शामिल आदिवासियों को रिहा करने की मांग की है. मंच ने कहा है कि इन आदिवासियों को पुलिस ने माओवादी बता कर गिरफ़्तार किया है.

मूलनिवासी बचाओ मंच ने आरोप लगाया है कि 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर सिलगेर में आम सभा का आयोजन किया गया था. इस आम सभा में सुकमा और बीजापुर ज़िले के 13,656 आदिवासी शामिल हुए थे.

दो नवंबर को जब ये आदिवासी सभा से लौट रहे थे तो चिंतलनार और बुर्कापाल कैंप के पुलिसकर्मियों ने मोरपल्ली गांव में 55 आदिवासियों को माओवादी बता कर हिरासत में ले लिया.

आदिवासियों का आरोप है कि ये सभी लोग कोंटा क्षेत्र के भंडारपदर, पुराना भेज्जी, मोरपल्ली, कुम्मोड़तोंग, कारकनगुड़ा और दुलेड़ी के रहने वाले हैं.

पुलिस ने बाद में 47 लोगों को छोड़ दिया लेकिन 8 लोगों को माओवादी बता कर जेल भेजने की बात कही जा रही है.


मूलवासी बचाओ मंच ने अपने एक बयान में कहा है कि हम लोग अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करके धरना में शामिल हुए थे. कई बार बस्तर के अधिकारी व खुद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने हमें आश्वासन दिया है कि जो लोग लोकतांत्रिक शांतिपूर्वक तरीके से आंदोलन में शामिल हो रहे हैं, उनको बिल्कुल रोका नहीं जाएगा.

बयान में कहा गया है कि हर बार हमारे कार्यक्रम व आंदोलन में शामिल होने वाले लोगों को क्यों रोका जा रहा है, थानों में बिठाया जा रहा है व पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया जाता है?

मंच ने इन सभी आठ लोगों की निःशर्त रिहाई की मांग की है.

पुलिस का दावा

इधर पुलिस ने दावा किया है कि माओवादियों की सक्रियता की ख़बर के बाद दो नवंबर को ऑपरेशन की शुरुआत की गई थी, जिसमें आठ माओवादियों को गिरफ्तार किया गया है.

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार लोगों में से एक कवासी राजू उर्फ संतू के सिर पर आठ लाख और दूसरे नक्सली कलमू मादा के ऊपर पांच लाख रुपये का इनाम है. वहीं, कोमराम कान्हा, मदकम हिडमा, तुरसम मुदराज और मदकम एनका पर एक-एक लाख रुपये का इनाम था.

इसके अलावा, दो अन्य लोगों की पहचान मदकम सोमा और मदकम मुत्ता के रूप में हुई है. सुरक्षा बलों ने इनके पास से 35 डेटोनेटर, छह जिलेटिन की छड़ें, दो आईईडी, बैटरियां, तार और अन्य सामग्री बरामद करने का दावा किया है.

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