छत्तीसगढ़

मंत्री से माइक छीनाऔर कलेक्टर को खरी-खरी

कोरबा | असलम: मंत्री से ननकी राम कंवर ने माइक छीनी और कलेक्टर पर हमला बोल दिया. कलेक्टर दयानंद पी भी चुप नहीं रहे. आईएएस कलेक्टर ने भी सफाई दी लेकिन ननकी राम तो ननकी राम हैं. वो भला कहां चुप रहने वाले थे.

छत्तीसगढ़ के कोरबा में लोक सुराज अभियान के समाधान शिविर में ओडीएफ मे किये जा रहे भ्रष्टाचार के मुददे पर पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर और कोरबा कलेक्टर पी.दयानंद मंच पर ही आमने सामने हो गये. लोक सुराज अभियान के तहत कोरबा के करतला विकासखंड के ग्राम पकरिया में समाधान शिविर का आयोजन किया गया था, जिसमे स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप भी पहुंचे हुए थे.

मंत्री जी द्वारा जब गांव में शौचालय निर्माण की जानकारी चाही गई तो कोरबा कलेक्टर करतला विकाखंड को ओडीएफ किये जाने की जानकारी देने लगे. लेकिन मंच पर बैठे पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर को कलेक्टर पी दयानंद का बयान नहीं जंचा. आव देखा न ताव, ननकी राम कंवर ने मंत्री केदार कश्यप से माईक छीनकर कलेक्टर को खरी-खरी सुनाना शुरु किया.

भरी सभा में पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर और कलेक्टर पी दयानंद के बीच जमकर नोकझोक हुई, वहीं मंत्री केदार कश्यप इस पूरे नजारे को देख कर हक्के बक्के रह गये और अंततः मंच से उठकर चले गए.

क्या कहा ननकी ने

कलेक्टर- कुछ लोग पलायन कर कहीं और चले गए थे, फिर वापस आए हैं. कह रहे हैं कि उनका शौचालय बनना चाहिए. उनको भी बनाकर देंगे !

ननकीराम कंवर-ऐसा नहीं है भाई, करतला ब्लॉक में कोरबा के जिले के अधिकारी अपने आप को ज्यादा उस्ताद समझ रहे हैं. इस गांव में आते ही अधिकारियों का इनकम बना हुआ है.

कलेक्टर- ऐसा नहीं है.

ननकीराम कंवर- मैं बता सकता हूं. यहां किसान लोग शिकायत किए हैं. ऐसा नहीं. काम करना है तो सही तरीके से काम करिए वरना छुट्टी किजिए. भ्रष्टाचार का तो हद हो गया है. कोई भी मकान में पांच हजार-दस हजार खाए बिना काम नहीं करते हैं. कोरबा जिले की स्थिति बदतर बना दिए हैं. कई सरपंच बता रहे हैं, बिना पैसे काम नहीं होता.

कलेक्टर- नहीं… नहीं… ऐसा नहीं है. अगर किसी सरपंच को पटवारी से शिकायत है, या तहसील से ( केदार कश्यप कहते रहे-आप बैठिए मैं कह रहा हूं )

कलेक्टर- शिकायत है तो आकर प्रमाण सहित शिकायत करें.

केदार कश्यप- ऐसे कोई भी मामले होंगे, जिसकी कोई भी प्रमाण सहित जानकारी दें आप, कार्रवाई करेंगे.

कलेक्टर- शौचालय नहीं बने हैं, बिल्कुल भी नहीं बने हैं, ऐसा कहना तो हतोत्साहित करना है.

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