कलारचना

आइटम सांग नहीं चाहिये बरुआ को

नई दिल्ली : फिल्मकार जाहनु बरुआ ने कहा है कि वे किसी भी हालत में अपनी फिल्मों को लोकप्रिय करने के लिये आइटम सांग जैसे मसाले का इस्तेमाल नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि इससे फिल्मकार की कमजोरी प्रदर्शित होती है. उनका कहना है कि वे कोशिश कर रहे हैं कि जल्दी ही कुछ ऐसा किया जाये, जिससे हिंदी फिल्म जगत में भी कुछ वे बेहतर कर सकें.

बरुआ कई फिल्मों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीत चुके हैं. बरुआ की असमिया फिल्मों ‘एंड द रिवर फ्लोज’, ‘अपारूपा’ और ‘बोनानी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है. उन्होंने हिंदी भाषा की फिल्म ‘मैंने गांधी को नहीं मारा’ का भी निर्देशन किया था.

बरुआ ने बताया, “मुझे आइटम नम्बर पसंद नहीं हैं, क्योंकि मैं इन सबके लिए खुद को सहज महसूस नहीं करता हूं. 50 और 60 के दशकों में भी कई फिल्में व्यवसायिक रूप से बेहद सफल रही हैं और उनमें आइटम नम्बर नहीं होते थे. हमने अपनी रचनात्मकता को खुद ही खराब करना शुरू किया है.” उन्होंने कहा, “यदि फिल्मकार अपनी फिल्म को बेचने के लिए कहानी में मसालेदार चीजें शामिल करता है, तो यह उसकी कमजोरी है.”

बरुआ की हालिया प्रदर्शित फिल्म ‘बंधोन’ 26/11 मुंबई हमले की वास्तविक घटना से प्रेरित है. पीवीआर डायरेक्टर्स रेयर द्वारा पांच जुलाई को पूरे भारत में प्रदर्शित की गई यह फिल्म बरुआ की पहली असमिया फिल्म है जो राज्य के बाहर प्रदर्शित की गई है.वैसे बरुआ हिंदी फिल्मों में भी हाथ आजमा चुके हैं, लेकिन वह असमिया भाषा में ही फिल्म बनाना पसंद करते हैं क्योंकि वहां उनको अपनी रचनात्मकता के साथ समझौता नहीं करना पड़ता.

उन्होंने कहा, “मुझे असमिया भाषा में फिल्में बनाना पसंद है, क्योंकि यहां मैं फिल्म के विषय और सामग्री पर पूरा ध्यान केन्द्रित कर सकता हूं. यहां किसी का हस्तक्षेप नहीं होता. हिंदी फिल्मों में लोगों का बहुत हस्तक्षेप होता है. उदाहरण के लिए आप अपनी फिल्म में बिना वजह आइटम नम्बर कैसे शामिल कर सकते हैं, जब फिल्म की कहानी से उसका कोई लेना-देना न हो, लेकिन आपको ऐसा करने के लिए कहा जाता है.” बरुआ की दूसरी हिंदी फिल्म ‘हर पल’ जल्द ही आने वाली है. उन्हें उम्मीद है कि हिंदी फिल्म जगत के दर्शक उनकी इस फिल्म को अच्छा प्रतिसाद देंगे.

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