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खुशखबरी !! मानसून अच्छा रहेगा

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: दो साल से पड़ रहे सूखे के बीच खबर है कि इस बार मानसून अच्छा रहेगा. मौसम विज्ञान कार्यालय के अऩुसार इस साल पिछले साल की तुलना में 20 फीसदी बारिश ज्यादा होगी. पिछले साल बारिश सामान्य से 14 फीसदी कम हुई थी तथा इस बार सामान्य से 6 फीसदी बारिश ज्यादा होगी. साल 2015 में पड़े सूखे से छत्तीसगढ़ भी बुरी तरह से प्रभावित रहा है. यह खबर किसानों, आम जनता तथा कारोबारियों के लिये खुशिया भरा है. लगातार दो साल सूखा पड़ने के बाद देश में 2016 में अल नीनो का प्रभाव कम होने से औसत से अधिक मानसूनी बारिश होने की संभावना है.

यह जानकारी मौसम विज्ञान विभाग की ओर से मंगलवार को जून-सितंबर मानसून ऋतु के लिए यहां जारी प्रथम पूर्वानुमान में दी गई. मौसम विभाग के निदेशक लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने यहां जारी एक बयान में कहा, “2015 में औसत से 14 फीसदी कम बारिश हुई थी, जबकि 2016 में औसत से छह फीसदी अधिक बारिश हो सकती है. लगातार दो साल सूखा पड़ने के बाद यह वर्ष बेहतर हो सकता है.”

मौसम विभाग ने कहा है कि जून से सितंबर तक, मानसून के चारो महीने में सामान्य से अधिक वर्षा होगी. विभाग ने साथ ही अधिक बारिश होने की स्थिति में बाढ़ आने की भी चेतावनी दी है.

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक सामान्य मानसूनी बारिश की संभावना 30 फीसदी है, औसत से अधिक मानसूनी बारिश की संभावना 34 फीसदी है और अत्यधिक बारिश की संभावना 30 फीसदी है. वहीं औसत से कम बारिश की संभावना पांच फीसदी और काफी कम बारिश की संभावना एक फीसदी है.

निजी क्षेत्र की मौसम पूर्वानुमानन कंपनी स्काईमेट ने भी मानसूनी बारिश के औसत से अधिक रहने की संभावना जाहिर की है.

इस भविष्यवाणी को बाजार ने काफी सकारात्मक रूप से लिया है. शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई.

बंबई स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 123.43 अंकों की तेजी के साथ 25,145.59 पर बंद हुआ. सोमवार को भी सेंसेक्स में 348 अंकों की तेजी रही थी.

मानसून का देश की बारिश में 75 फीसदी योगदान होता है और यह कृषि क्षेत्र की आधी जरूरत को पूरी करता है. यह देश के जलाशयों के भरने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

राठौड़ ने कहा, “मानसूनी बारिश औसत की 104-110 फीसदी रह सकती है और कुल मिलाकर मानसून देश में सभी जगहों पर सक्रिय रहेगा.” उन्होंने हालांकि पूर्वोत्तर और पूर्व तटीय क्षेत्रों में मानसूनी बारिश थोड़ी कम रहने की संभावना भी जताई.

उन्होंने साथ ही कहा कि मानसून के आगमन से दो सप्ताह पहले हालांकि अधिक स्पष्ट आंकड़े मिल सकेंगे.

राठौड़ ने कहा, “हर सूरत में हम आंकड़ों के पांच फीसदी कम या अधिक रहने की संभावना मानकर चलते हैं. इसलिए अत्यधिक बारिश की भी संभावना है. औसत से अधिक बारिश की स्थिति में बाढ़ की संभावना बढ़ जाती है.”

उन्होंने कहा कि दक्षिण महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में पिछले साल भयंकर सूखा पड़ा. इस साल इन क्षेत्रों में काफी मानसूनी बारिश होने की उम्मीद है.

राठौड़ ने कहा, “गत 31 साल से मानसूनी बारिश कम रही है. लेकिन, आने वाला समय बेहतर होने वाला है.”

लेकिन, उन्होंने देश के पश्चिम और भारतीय प्रायद्वीप से बाहर की अन्य मौसमी परिस्थितियों से वास्तविक बारिश के प्रभावित होने की संभावना को भी इंकार नहीं किया.

भारत में मानसून की अवधि चार महीने यानी 1 जून से 30 सितम्बर तक मानी जाती है. इससे सम्बन्धित सभी भविष्यवाणियाँ 16 अप्रैल से 25 मई के दौरान की जाती हैं. मानसून विभाग लगभग 16 पैरामीटरों का बारीकी से अध्ययन कर मानसून की भविष्यवाणी करता है.

इन 16 पैरामीटरों को चार भागों में बाँटा गया है और इन्हीं पैरामीटरों को आधार बनाकर मानसून के पूर्वानुमान निकाले जाते हैं. पूर्वानुमान निकालते समय तापमान, हवा, दबाव और बर्फबारी जैसे कारकों का ध्यान भी रखा जाता है.

मौसम विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और विदर्भ में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 10 जून होती है.

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