राष्ट्र

बाढ़ राहत: 1500 ट्रक रास्ते में फंसे

श्रीनगर | एजेंसी: जम्मू-कश्मीर में बाढ़ से बचाव के बाद राहत सामग्री पहुंचाने में रुकावटे सामने आ रहीं है. भारी बारिश तथा बाढ़ में सड़कों के बह जाने के कारण राहत सामग्री को बाढ़ प्रभावितों तक नहीं पहुंचाया जा सक रहा है. मंगलवार को जम्मू एवं कश्मीर में बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए राहत सामग्री ले जा रहे करीब 1,500 ट्रक मंगलवार को जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर फंस गए. राजमार्ग का काफी हिस्सा बाढ़ में बह जाने की वजह से घाटी का संपर्क बाकी देश से टूट गया है. अधिकारियों ने बताया कि करीब 300 किलोमीटर लंबे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा या तो बाढ़ में बह गया या भूस्खलन में दब गया.

राजमार्ग को सबसे ज्यादा नुकसान रामबन जिले के रामसू इलाके में पहुंचा है, जहां करीब 40 किलोमीटर सड़क पूरी तरह ध्वस्त हो गई है.

राजमार्ग मंगलवार को लगातार छठे दिन भी बंद रहा.

अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि राज्य में बाढ़ से 160 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन मरने वालों की वास्तविक संख्या एवं नुकसान का सही आकलन बाद में ही हो पाएगा.

घाटी में स्थानीय टेलीविजन तथा रेडियो स्टेशनों का प्रसारण भी बंद रहा. घाटी तथा जम्मू क्षेत्र के बीच संचार संपर्क भी नहीं है.

उधमपुर जिले के सदल गांव में मंगलवार सुबह सात शव बरामद हुए, जबकि सेना का कहना है कि 31 लोग अब भी लापता हैं. इस इलाके में फंसे लोगों की मदद के लिए सेना ने सोमवार को सात अभियान चलाए. सोमवार को राजौरी जिले के मन्मजाकोट गांव में दो शव बरामद हुए.

जम्मू क्षेत्र में बाढ़ से करीब 2,000 घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं.

जम्मू क्षेत्र में हालांकि, मंगलवार को बारिश नहीं हुई, जिससे सेना तथा अन्य सुरक्षा बलों के राहतकार्य में तेजी आने की उम्मीद है.

उधर, माता वैष्णो देवी यात्रा सोमवार को भी स्थगित रही. माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के उप-मुख्य कार्यकारी अधिकारी एम.के. भंडारी ने कहा कि यात्रा शुरू करने का निर्णय बाद में लिया जाएगा.

जम्मू एवं कश्मीर में सड़क संपर्क बहाल होने और संचार लाइनें दुरुस्त होने के बाद ही नुकसान के सही आकलन की जानकारी मिल पाएगी. कश्मीर घाटी के लिए रवाना आवश्यक सामग्रियों से लदे करीब 1,500 ट्रक 300 किलोमीटर लंबे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर विभिन्न स्थनों पर फंसे हैं, क्योंकि इस मार्ग पर सड़कें बाढ़ के पानी के कारण ध्वस्त हो गई हैं या भूस्खलन के कारण नष्ट हो गई हैं.

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