राष्ट्र

कांग्रेस-भाजपा दिल्ली में आप से परेशान

नई दिल्ली | एजेंसी: दिल्ली विधानसभा का चुनाव इस बार त्रिकोणीय होने जा रहा है. ऐसा 11 माह पहले बने आम आदमी पार्टी के कारण हो रहा है. बताया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी ने एक लहर पैदा कर दी है. इस बार नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच होने वाली सीधी टक्कर की कहानी पुरानी हो जाएगी.

एएपी की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है कि दिल्ली की 20 विधानसभा सीटों पर जीत केवल कुछ सौ वोटों से हुई थी. केवल एक ही वर्ष में एएपी ने 12,000 पंजीकृत समर्थकों की फौज खड़ी कर ली है. इनमें से 4000 छात्र हैं और उनमें भी 400 आईआईटी दिल्ली के हैं.

अब मुकाबले में ‘एएपी’ भी मजबूती से दावा करती नजर आ रही है. हालांकि कांग्रेस और भाजपा ने ‘एएपी’ के भारी विजय के दावे को खारिज कर दिया है, लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि एएपी दोनों पार्टियों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखती है.

आलोचक और प्रशंसक इसका पूरा श्रेय अरविंद केजरीवाल को देते हैं. राजनीति में उतरने से पहले केजरीवाल भारतीय राजस्व सेवा के एक अधिकारी थे.

कांग्रेस पार्टी के दिल्ली प्रभारी शकील अहमद ने स्वीकार किया कि एएपी कांग्रेस और भाजपा को प्रभावित करेगी. अहमद ने आईएएनएस से कहा, “वह भाजपा और कांग्रेस दोनों के वोट काटेगी.”

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस से कहा कि एएपी कांग्रेस की तुलना में भाजपा को अधिक नुकसान पहुंचा सकती है. केजरीवाल का सरकार विरोधी अभियान कांग्रेस विरोधी वोट को विभाजित कर सकता है.

एएपी के कुमार विश्वास ने कहा, “इससे पहले दिल्ली के लोगों के पास कांग्रेस और भाजपा के अलावा और कोई विकल्प नहीं था. अब उनके पास एएपी के तौर पर एक विकल्प है.”

कांग्रेस ने 2008 के चुनाव में 40.31 प्रतिशत वोट के साथ 70 में से 46 सीटें हासिल की थीं. भाजपा को 36.84 प्रतिशत वोट हासिल होने के बावजूद हार का मुंह देखना पड़ा था.

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