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बिहार में नक्सली हमला

पटना | एजेंसी: बिहार के औरंगाबाद जिले के ओबरा थाना क्षेत्र में गुरुवार देर शाम हुए बारूदी सुरंग विस्फोट में सात लोगों की मौत की घटना के बाद पुलिस अधीक्षक का स्थानांतरण कर दिया गया है. इधर, सरकार ने मृतक के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की

सहायता राशि देने की घोषणा की है. पटना पुलिस मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि घटना के बाद औरंगाबाद के पुलिस अधीक्षक दलजीत सिंह को मुख्यालय बुला लिया गया है तथा दरभंगा जिले के पुलिस अधीक्षक उपेन्द्र शर्मा को औरंगाबाद का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है.

मुख्यमंत्री सचिवालय के अनुसार, घटना के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तत्काल पुलिस महानिदेशक अभयानंद को अपने आवास पर बुलाकर समीक्षा बैठक की और मृतक के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये सहायता राशि देने की घोषणा की है. घटना के बाद से नक्सल प्रभावित सभी जिलों में नक्सलियों के खिलाफ छापेमारी अभियान तेज कर दिया गया है.

उल्लेखनीय है कि ओबरा थाना क्षेत्र में पिसाय गांव के नजदीक नक्सलियों द्वारा बारूदी सुरंग में किए गए विस्फोट में औरंगाबाद की जिला पार्षद सुधा देवी के पति सुशील पांडेय सहित सात लोगों की मौत हो गई थी.

सूत्रों के अनुसार, पांडेय नक्सलियों के निशाने पर थे. पांडेय का रणवीर सेना के साथ करीबी रिश्ता रहा है और इस घटना को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, माओवादी और रणवीर सेना के आपसी संघर्ष के रूप में देखा जा रहा है.

गौरतलब है कि 90 के दशक में रणवीर सेना और भाकपा, माओवादी के बीच हुए खूनी संघर्ष में सैकड़ों लोगों की जान गई थी.

जून 2000 में सेना और भाकपा, माओवादी के बीच संघर्ष औरंगाबाद जिले के मियांपुर गांव में हुआ था, जहां भाकपा, माओवादी के 33 कथित समर्थकों की हत्या कर दी गई थी. इस घटना के बाद दोनों संगठनों के समर्थक एक-दूसरे से टक्कर लेने से बच रहे थे. कहा जाता है कि मियांपुर की घटना अरवल के सेनारी गांव में भाकपा, माओवादी द्वारा किए गए नरसंहार का बदला था.

इस घटना के बाद जहां सेना सुस्त पड़ते चली गई, वहीं भाकपा, माओवादी ने भी संघर्ष छोड़ संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दिया.

वैसे तो औरंगाबाद में रणवीर सेना का कोई सशक्त संगठन नहीं रहा है, लेकिन समय-समय पर सेना के समर्थक यहां कमान संभालते रहे हैं. सुशील पांडेय भी 90 के दशक के उत्तरार्ध में नक्सलियों के सबसे बड़े शत्रु रहे थे.

औरंगाबाद में गुरुवार को नक्सली घटना के बाद रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्ममेश्वर मुखिया के पुत्र और राष्ट्रवादी किसान संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष इंदुभूषण ने सरकार को चेताते हुए कहा है कि किसान जाग जाएंगे तो उन पर काबू पाना सरकार के वश के बाहर हो जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी मंशा साफ करनी चाहिए.

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